बढ़ते कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (पिम्स) ने कुछ अहम फैसले लिए हैं। पिम्स के रेजीडेंट डायरेक्टर अमित सिंह ने कहा कि 18 साल से कम उम्र के बच्चे घर में ही रहें। पिम्स में दाखिल मरीज को केवल एक परिजन ही मिले। एक से अधिक परिजनों के मिलने पर पाबंदी है। इसके अलावा पिम्स में आने वाले लोगों की प्री स्क्रीनिंग शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि यह आदेश केवल लोगों की भलाई के लिए ही है।
हनीमून से लौटे युवक में कोरोना के लक्षण, सैंपल जांच के लिए भेजे
रोपड़। दुबई में हनीमून से लौटे युवक में कोरोना वायरस के लक्षण मिले हैं। इसके बाद उसे और उसकी पत्नी को सरकारी अस्पताल में दाखिल कर लिया गया है। जानकारी के अनुसार यह नवविवाहित जोड़ा 28 फरवरी को दुबई से लौटा था। छह दिन पहले 13 मार्च को युवक का स्वास्थ्य खराब हो गया। उसे बुखार और जुकाम हो गया। पहले परिवार घर में ही दवाई करता रहा। सुधार न होने पर युवक को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जिला स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत एक्शन लेते हुए युवक और उसकी पत्नी के सैंपल लेकर बुधवार शाम पीजीआई चंडीगढ़ भेज दिए। सिविल सर्जन डॉ. एचएन शर्मा ने बताया कि सैंपल पीजीआई चंडीगढ़ भेजे गए हैं और वहां से रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
पठानकोट एयरपोर्ट पर वीरवार सुबह दिल्ली से आए विमान में पहुंचे 32 यात्रियों की सेहत विभाग की रैपिड एक्शन टीम ने जांच की। सभी यात्री स्वस्थ पाए गए। इनमें से 4 लोग विदेश से जबकि अन्य लोग दिल्ली समेत अन्य राज्यों से आए थे। जर्मनी से आए छात्र समेत दो लोगों ने सिविल में अपना चेकअप करवाया।
चेकअप में उनमें कोरोना का कोई लक्षण नहीं पाया गया। बता दें, अब तक विदेशों से पठानकोट पहुंचे 81 लोगों की रैपिड एक्शन टीम जांच कर चुकी है, जिनमें से 35 लोगों को अंडर सर्विलांस रखा गया है। हालांकि पठानकोट में कोई भी करोना पॉजीटिव मरीज नहीं मिला है।
जर्मनी से आए युवक को अन्य मरीजों की लाइन में खड़ा किया
जर्मनी से पठानकोट पहुंचा छात्र वीरवार को सिविल अस्पताल में चेकअप के लिए पहुंचा। बारी आने पर उसने डॉक्टर को बताया कि वह जर्मनी से लौटा है। इस पर डॉक्टर ने उसे बाहर अन्य मरीजों के साथ प्रतीक्षा करने को कहा। लगभग आधा घंटा युवक ओपीडी में बैठा रहा। उसके बाद दोबारा युवक को अंदर बुलाया गया और चेकअप कर दवाई देकर घर भेज दिया गया।
एसएमओ डॉ. भूपिंद्र सिंह ने कहा कि जो भी व्यक्ति दूसरे देश से आता है तो वह अपना एक बार जरूर चेकअप करवा ले। ताकि समय रहते समस्या को खत्म किया जा सके। अगर अस्पताल में दूसरे देश से आया व्यक्ति खुद चेकअप के लिए आता है तो यह बहुत ही अच्छी बात है। अभी तक जिले में कोई भी कोरोना वायरस का मरीज नहीं मिला है।
सेहत विभाग ने हाल ही में बहरीन से लौटे शहर के 40 वर्षीय युवक में कोरोना के लक्षण दिखाई देने के बाद उसे फरीदकोट के गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया है। उसे मेडिकल के आइसोलेशन वार्ड में दाखिल कर लिया गया है और उसके सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं।
जानकारी के अनुसार बहरीन से लौटने के बाद उक्त व्यक्ति को बुखार और खांसी की तकलीफ थी और वीरवार को वह सिविल अस्पताल पहुंचा था। जांच के बाद जब सेहत विभाग ने उसे दाखिल होने की सलाह दी तो वह घर जाने की जिद करने लगा लेकिन बाद में सेहत विभाग ने उसे जबरन एंबुलेंस के माध्यम से फरीदकोट भेज दिया। एसएमओ डॉ. हरकंवलजीत सिंह ने कहा कि यह मरीज फरीदकोट की जगह कोटकपूरा में इलाज करवाने की जिद कर रहा था लेकिन ऐसे माहौल में किसी की जिद पूरे समाज के लिए मुसीबत बन सकती है।
लुधियाना: जिले में 13 संदिग्ध की जांच रिपोर्ट नेगटिव, स्थिति कंट्रोल में
कोरोना को लेकर जिला लुधियाना में सब कुछ ठीक चल रहा है, अभी तक 13 संदिग्ध लोगों की जांच सेहत विभाग ने की है। इनकी रिपोर्ट नेगटिव आई है। यह जानकारी डीसी प्रदीप अग्रवाल ने दी। वह वीरवार देर शाम को सभी अधिकारियों के साथ कोरोना को लेकर बैठक कर रहे थे। उन्होंने बताया कि बीते 24 घंटे के दौरान दो संदिग्ध मामले सामने आए थे, जिनकी नेगटिव रिपोर्ट आ चुकी है।
उन्होंने बताया जेल में बंद कैदियों और उनके परिजनों की मुलाकात पर 31 मार्च तक रोक लगा दी गई है। अगर जेल में बंद किसी कैदी से इमरजेंसी हालात में मुलाकात करनी जरूरी है, तो जेल सुपरिटेंडें की निगरानी में हो सकती है। वही जिला भर में कोरोना को लेकर लोगों को जागृत करने के लिए दो हजार टीमें काम में जुट चुकी है। उन्होंने सभी लोगों को जारी की गई गाइड लाइन के मुताबिक काम करने की सलाह दी है।
अपने एक रिश्तेदार के घर दुबई से आए व्यक्ति का पता चलने पर स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया और उसे जांच के लिए सिविल अस्पताल लाया गया। स्क्रीनिंग के बाद उसे घर भेज दिया गया। इस व्यक्ति को दुबई से आए हुए 28 दिन से अधिक हो गए थे। डाक्टरों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के दिशा निर्देशों पर अस्पताल में आने वाले खांसी जुकाम के मरीजों को अलग वार्ड में रखा जा रहा है। जबकि उनके लिए अलग ओपीडी लगाई जा रही है।
वहीं सिविल अस्पताल की आशा वर्करों ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि एक ओर तो विभाग ने उन्हें घर घर जाकर लोगों को करोना के प्रति जागरूक करने के आदेश जारी कर रहा है लेकिन इसके लिए उन्हें न तो मास्क दिए गए हैं और न ही सेनिटाइजर उपलब्ध करवाए गए हैं। उन्होंने शीघ्र ही सेनिटाइजर और मास्क उपलब्ध करवाने की मांग की। सिविल सर्जन ने बताया कि मास्क और सेनिटाइजर संबंधी जिला सिविल सर्जन को अवगत करवाया जाएगा।