अग्रवाल ने बताया कि आईसीएमआर के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि मरीजों को कोई पुरानी बीमारी के बिना कोविड से प्रभावित पाया जाता है, तभी उसकी मौत को कोविड से मौत माना जाता है। राज्य की मृत्यु दर, राष्ट्रीय औसत मृत्यु दर (3 प्रतिशत) की अपेक्षा बहुत कम है। अग्रवाल ने आगे कहा कि इसके अलावा बहुत से मामलों में शव के नमूने लिए गए हैं, जिनमें से कुछ पॉजिटिव पाए गए लेकिन यह सभी मौतें कोविड-19 मौत के तौर पर ली गई, जबकि यह नमूने सिर्फ संभावित पॉजिटिव मामलों के संपर्क का पता लगाने के उद्देश्य से लिए गए थे।
कोविड से हुई मौतों का विश्लेषण करने को कमेटी गठित
राज्य में हुई मौतों का विश्लेषण और समीक्षा करने के लिए डॉ. तलवार के नेतृत्व में विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं की निदेशक डॉ. अवनीत कौर ने बताया कि आठ मरीज अंतिम चरण पर गुर्दे की बीमारी से जूझ रहे थे और वह डायलिसिस पर थे, इसलिए उनकी जान पहले ही खतरे में थी। इसके अलावा 9 मरीज मधुमेह की गंभीर बीमारी से ग्रस्त थे। उन्होंने आगे बताया कि कुछ मामलों में मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर थी, क्योंकि वह एचआईवी पॉजिटिव थे।