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कोरोना वायरस: ईरान से आए मर्चेंट नेवी के कर्मचारी की तबीयत बिगड़ी, आइसोलेशन वार्ड में भर्ती

Tue, 17 Mar 2020 09:25 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भिवानी (हरियाणा)
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कोरोना वायरस - फोटो : ANI
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सात दिन पहले ईरान से आए मर्चेंट नेवी के एक कर्मचारी को बुखार-जुकाम की शिकायत के बाद आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया है। जहां उसका इलाज शुरू हो गया है। कोरोना की जांच के लिए उसका सैंपल पीजीआई रोहतक भेजा गया है। जिसकी रिपोर्ट 24 घंटे में आएगी।

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सामान्य अस्पताल की ओपीडी में मंगलवार की दोपहर एक युवक फीजिशियन डॉ. रघुवीर शांडिल्य के पास पहुंचा। उसने सर्दी-जुकाम की शिकायत बताते हुए कहा कि वह मर्चेंट नेवी में काम करता है। उसने बताया कि वह सात मार्च को ईरान से आया है। 

अब तीन दिन से उसे बुखार हो रहा है और गले में दर्द है। युवक के बीमारी के लक्षण बताते ही अस्पताल में हड़कंप मच गया। डॉक्टर ने उसे तुरंत मास्क उपलब्ध कराते हुए आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया। उसका सैंपल जांच के लिए पीजीआई रोहतक भेजा गया। युवक अनाजमंडी चौकी क्षेत्र के एरिया का रहने वाला है। वह सात मार्च को ही ईरान से आया है। जिले में कोराना संदिग्ध मिलने का यह पहला मामला है।  

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ईरान से भिवानी बिना जांच के कैसे पहुंचा

विदेश से आने वाले प्रत्येक नागरिक के स्वास्थ्य की गंभीरता से जांच की जा रही है। उसे 28 दिनों तक डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाता है। ऐसे लोगों को 14 दिन तक महानगरों में बनाए केंद्रों और बाकी 14 दिन जिलास्तर पर निगरानी में रखा जाता है।

मगर अस्पताल पहुंचे पहले संदिग्ध मरीज ने बताया कि वह सात मार्च को ही ईरान से भिवानी आया हूं। तीन दिन से उसे बुखार और गले में दर्द की शिकायत है। युवक बिना मास्क के अस्पताल पहुंचा। ऐसे में यह विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा कर रहा है। 

ऐसे तो गंभीर होंगे हालात
सामान्य अस्पताल की ओपीडी में इतनी भीड़ रहती है कि पांव रखने तक की जगह नहीं होती। फिजिशियन कक्ष, बाल रोग विशेषज्ञ और महिला रोड विशेषज्ञ के कक्षा साथ-साथ है और इनकी औसतन ओपीडी हर रोज करीब एक हजार होती है। सामने आया कोरोना वायरस संदिग्ध मरीज भी सामान्य मरीजों की तरह ओपीडी में आया और फीजिशियन को अपनी बीमारी बताई। ऐसे में यदि कभी कोई पॉजटिव मरीज आता है तो यहां बीमारी फैलने का बेहद खतरा है। बस स्टैंड पर बसों को, रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों और प्लेटफार्म पर बार-बार दवा का स्प्रे किया जा रहा है और ओपीडी में यह सुविधा भी नहीं है।
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