विदेश से आने वाले प्रत्येक नागरिक के स्वास्थ्य की गंभीरता से जांच की जा रही है। उसे 28 दिनों तक डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाता है। ऐसे लोगों को 14 दिन तक महानगरों में बनाए केंद्रों और बाकी 14 दिन जिलास्तर पर निगरानी में रखा जाता है।
मगर अस्पताल पहुंचे पहले संदिग्ध मरीज ने बताया कि वह सात मार्च को ही ईरान से भिवानी आया हूं। तीन दिन से उसे बुखार और गले में दर्द की शिकायत है। युवक बिना मास्क के अस्पताल पहुंचा। ऐसे में यह विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा कर रहा है।
ऐसे तो गंभीर होंगे हालात
सामान्य अस्पताल की ओपीडी में इतनी भीड़ रहती है कि पांव रखने तक की जगह नहीं होती। फिजिशियन कक्ष, बाल रोग विशेषज्ञ और महिला रोड विशेषज्ञ के कक्षा साथ-साथ है और इनकी औसतन ओपीडी हर रोज करीब एक हजार होती है। सामने आया कोरोना वायरस संदिग्ध मरीज भी सामान्य मरीजों की तरह ओपीडी में आया और फीजिशियन को अपनी बीमारी बताई। ऐसे में यदि कभी कोई पॉजटिव मरीज आता है तो यहां बीमारी फैलने का बेहद खतरा है। बस स्टैंड पर बसों को, रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों और प्लेटफार्म पर बार-बार दवा का स्प्रे किया जा रहा है और ओपीडी में यह सुविधा भी नहीं है।