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कोरोना वायरसः हरियाणा में किसानों को फसल मुआवजा सर्वे लॉकडाउन में फंसा, टाइम बाउंड सर्कुलर

Fri, 27 Mar 2020 04:12 PM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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एक ओर ओलावृष्टि की वजह से बहुत से किसानों की फसलें खराब हो गई हैं, तो वहीं अब किसानों के फसल मुआवजे के सर्वे में लॉकडाउन का पेच फंस गया है। मगर इसके बावजूद हरियाणा सरकार ने इस सर्वे को एसेंशियल सर्विस मानते हुए इस बाबत टाइम बाउंड सर्कुलर जारी कर दिया है। हरियाणा कृषि विभाग ने सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश जारी कर यह स्पष्ट कर दिया है कि इस सर्वे को जरूरी काम मानते हुए निर्धारित समय में इस काम को पूरा कर रिपोर्ट सरकार को भेजी जाए। तीन चरणों में सर्वे के इस काम को पूरा कर रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जानी है।
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ये फंस रहा पेच
कृषि विभाग के सूत्रों ने बताया इस वक्त सबसे बड़ी दिक्कत लॉकडाउन की वजह से आ रही है। सर्वे के दौरान न तो बीमा कंपनियों का स्टाफ फील्ड में पहुंच पा रहा है। जबकि गांवों में भी किसान संक्रमण के डर की वजह से बाहर निकलने में थोड़ा हिचक रहे हैं। कई गांव में तो बाहरी लोगों की एंट्री पर मनाही है, के बोर्ड तक लगा दिए गए हैं। जबकि कृषि विभाग के स्टाफ को भी इस समय गांव-दर-गांव घूम कर लोगों के संपर्क में आने से संक्रमण का खतरा सता रहा है

ड्रोन से सर्वे करवा मुआवजा दे सरकार
किसान नेता हरबंस सिंह धुरखड़ा, अमरीक सिंह सिंह झरौली कलां व दुष्यंत चौहान खुड्डा कलां के अनुसार सरकार का यह फैसला सही है कि फसल नुकसान का मुआवजा संबंधित सर्वे एसेंशियल सर्विस है। लेकिन यदि इसमें लॉकडाउन की वजह से कोई दिक्कत आ रही है, तो सरकार इस सर्वे को ड्रोन के माध्यम से करवाएं। आज सरकार और बीमा कंपनियों के पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे कई आधुनिक उपकरण मौजूद हैं। जिसका इस्तेमाल ऐसे सर्वे के लिए होता रहता है। यदि ऐसा संभव भी नहीं हो  तो जिन किसानों ने  फसल मुआवजे के लिए आवेदन किया है , उन किसानों को सरकार तुरंत प्रभाव से  मुआवजा दे,  क्योंकि कोई भी किसान संकट की इस घड़ी में मुआवजे के नाम पर झूठ नहीं बोलेगा।
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तीन चरणों में करना है मुआवजे का सर्वे

क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट : सर्वे के इस पहले चरण में  क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट के तहत कृषि विभाग का स्टाफ हर जिले के प्रत्येक गांव में जाएगा और वहां विभिन्न खेतों में विभिन्न फसलों की 5 साल के उत्पादन की समीक्षा करेगा। यह एक्टिविटी फसल कटाई से पहले होती है। इसके लिए कृषि विभाग के स्टाफ को दो से तीन बार कटाई से पहले खेतों में पहुंचना होगा।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मुआवजा देने से पहले यह बहुत महत्वपूर्ण एक्सरसाइज मानी जाती है। इस दौरान किसान भी मौजूद रहते हैं। इसी एक्सरसाइज में यह तय होता है कि संबंधित इलाके में संबंधित फसल से किसान पिछले 5 साल में मार्केट वैल्यू के हिसाब से औसतन कितना कमा रहा है। इसी राशि को मुआवजे का मुख्य आधार माना जाता है।

क्रॉप बुकिंग - दूसरे चरण में कृषि विभाग के कर्मचारी 10 दिन में यह यह सर्वे करेंगे कि प्रत्येक गांव में किसानों ने कौन-कौन सी फसलें कितने क्षेत्र में बोई हैं। जिसका मिलान बाद में राजस्व विभाग के अंतर्गत पटवारियों द्वारा की गई गिरदावरी से मिलान किया जाएगा।

स्थानीय सर्वे - तीसरे चरण में एग्रीकल्चर डेवलपमेंट ऑफिसर या उसके समकक्ष अफसर के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन होता है। जिसमें किसान और बीमा कंपनियों का प्रतिनिधि शामिल होता है। यह कमेटी उस खेत में जाकर लोकल सर्वे करती है, जहां किसान की फसल का नुकसान हुआ होता है। यह चरण भी बहुत महत्वपूर्ण होता है जिसे फसल कटाई से पहले पूरा करना होता है।
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