एक ओर ओलावृष्टि की वजह से बहुत से किसानों की फसलें खराब हो गई हैं, तो वहीं अब किसानों के फसल मुआवजे के सर्वे में लॉकडाउन का पेच फंस गया है। मगर इसके बावजूद हरियाणा सरकार ने इस सर्वे को एसेंशियल सर्विस मानते हुए इस बाबत टाइम बाउंड सर्कुलर जारी कर दिया है। हरियाणा कृषि विभाग ने सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश जारी कर यह स्पष्ट कर दिया है कि इस सर्वे को जरूरी काम मानते हुए निर्धारित समय में इस काम को पूरा कर रिपोर्ट सरकार को भेजी जाए। तीन चरणों में सर्वे के इस काम को पूरा कर रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जानी है।
ये फंस रहा पेच
कृषि विभाग के सूत्रों ने बताया इस वक्त सबसे बड़ी दिक्कत लॉकडाउन की वजह से आ रही है। सर्वे के दौरान न तो बीमा कंपनियों का स्टाफ फील्ड में पहुंच पा रहा है। जबकि गांवों में भी किसान संक्रमण के डर की वजह से बाहर निकलने में थोड़ा हिचक रहे हैं। कई गांव में तो बाहरी लोगों की एंट्री पर मनाही है, के बोर्ड तक लगा दिए गए हैं। जबकि कृषि विभाग के स्टाफ को भी इस समय गांव-दर-गांव घूम कर लोगों के संपर्क में आने से संक्रमण का खतरा सता रहा है
ड्रोन से सर्वे करवा मुआवजा दे सरकार
किसान नेता हरबंस सिंह धुरखड़ा, अमरीक सिंह सिंह झरौली कलां व दुष्यंत चौहान खुड्डा कलां के अनुसार सरकार का यह फैसला सही है कि फसल नुकसान का मुआवजा संबंधित सर्वे एसेंशियल सर्विस है। लेकिन यदि इसमें लॉकडाउन की वजह से कोई दिक्कत आ रही है, तो सरकार इस सर्वे को ड्रोन के माध्यम से करवाएं। आज सरकार और बीमा कंपनियों के पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे कई आधुनिक उपकरण मौजूद हैं। जिसका इस्तेमाल ऐसे सर्वे के लिए होता रहता है। यदि ऐसा संभव भी नहीं हो तो जिन किसानों ने फसल मुआवजे के लिए आवेदन किया है , उन किसानों को सरकार तुरंत प्रभाव से मुआवजा दे, क्योंकि कोई भी किसान संकट की इस घड़ी में मुआवजे के नाम पर झूठ नहीं बोलेगा।