उद्योग की बदकिस्मती यह है कि उनको पहले नोटबंदी, जीएसटी और फिर जम्मू-कश्मीर में धारा 370 के निरस्त होने के बाद बंद हुए व्यापार और फिर नागरिकता संशोधन कानून ने बेजार कर दिया था। अभी वह उस झटके से उबर भी नहीं पाए थे कि कोरोना के कारण हुए लॉकडाऊन ने सदमा दे दिया। अभी केंद्र की उद्योगों को खोलने पर सहमति मिली ही थी कि श्रमिकों के घर वापसी अभियान ने फिर जोर का झटका दे दिया।
लुधियाना में सबसे अधिक
लुधियाना से एक लाख 95 हजार 273 श्रमिकों ने वापसी के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है, जबकि उनके साथियों सहित मिलाकर संख्या 5 लाख 17 हजार 813 है। इनमें यूपी के 3 लाख 06 हजार 122 लोग हैं। जबकि बिहार के एक लाख 90,599। वहीं जालंधर से 36 हजार 584 श्रमिकों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है, जिनकी साथियों के साथ संख्या एक लाख 3 हजार 606 है। इनमें यूपी के 49 हजार 686 लोग हैं, जबकि बिहार के 40,713।
श्रमिक वापस आएंगे, समय लगेगा तो ही बचेगा उद्योग
हैंड टूल निर्यातक एसोसिएशन के प्रधान गुरशरण सिंह का कहना है कि पंजाब से वापस जाने वाले श्रमिक वापस आएंगे, अभी समय लगेगा। पंजाब में इंडस्ट्री है, यहां के लोग मददगार हैं। जाने वाले श्रमिक परिवार से मिलना चाहते थे। अगर जा रहे हैं तो वापस आने का आश्वासन भी देकर जा रहे हैं। इंडस्ट्री का तो वैसे ही बुरा हाल है और झटके लगातार लग रहे थे। केंद्र सरकार को इंडस्ट्री को राहत पैकेज तो देना चाहिए।
पंजाब में इंडस्ट्री नए रूप में दिखेगी
आयकर विभाग के प्रसिद्ध वकील व इंडस्ट्री फाइनेंस के एक्सपर्ट दिनेश सरना का कहना है कि इंडस्ट्री आने वाले दिनों में नए रूप में दिखेगी तभी बचेगी। लॉकडाऊन कितना समय चलेगा, कुछ कहा नहीं जा सकता। अभी देश में कोरोना का ग्राफ बढ़ रहा है, कम नहीं हो रहा है। ऐसे में अगर श्रमिक जल्दी वापस नहीं आते तो इंडस्ट्री को चलाने के लिए नई मशीनरी लेनी पड़ेगी, ताकि आटोमैटिक काम हो। वैसे आने वाला समय इंडस्ट्री के लिए खतरनाक है।