जीएमसीएच-32 चंडीगढ़ की क्रिकेट टीम को कई बार जीत दिलाने वाले हरीश चंद्र मीरानिया जब कोरोना की चपेट में आए तो सभी को झटका लगा। उनके परिवार के साथ ही उनके सगे संबंधी और दोस्तों को भी हैरानी हुई, लेकिन हरीश उस स्थिति में भी पहले की तरह ही सामान्य थे। उनके लिए कोरोना किसी मैच से ज्यादा नहीं था।
अपनी इच्छाशक्ति, दृढ़ निश्चय और मजबूत इरादों के बल पर उन्होंने कई बार सामने वाली टीम को धूल चटाया था। इस बार बारी कोरोना की थी फिर वह कैसे कमजोर पड़ सकते थे। दुगनी ताकत से खुद को कोरोना को हराने के लिए तैयार किया और एक बार फिर जीत का बिगुल बजाया और फिर क्या था, कोरोना को हराकर एक बार फिर खुद को कैप्टन साबित कर दिखाया। हरीश चंद्र जीएमसीएच-32 में स्टाफ नर्स हैं।
ड्यूटी के दौरान ओटी में पॉजिटिव स्टाफ के संपर्क में आने के बाद 28 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव पाए गए। 29 अप्रैल की रात में उन्हें पीजीआई में शिफ्ट किया गया और 13 मई को रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद उन्हें पीजीआई से छुट्टी दे दी गई। कोरोना पॉजिटिव होने से लेकर ठीक होकर घर पहुंचने तक के बीच में उन्होंने कई नए अनुभव प्राप्त किए। हरीश का कहना है कि ये अनुभव पूरी उम्र याद रहेंगे।
शारीरिक और मानसिक मजबूती जरूरी
हरीश का कहना है कि पॉजिटिव मरीज के लिए शारीरिक तौर पर मजबूत होने के साथ ही मानसिक तौर पर भी मजबूत होना बहुत जरूरी है। क्योंकि उस स्थिति में तनाव का स्तर इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि उसका दुष्प्रभाव सीधे तौर पर शरीर पर तेजी से नजर आने लगता है।
मेडिकल के फील्ड से जुड़े होने के कारण हरीश इन चीजों को पहले से भलीभांति समझते थे इसलिए रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद भी उन्होंने खुद पर तनाव को हावी नहीं होने दिया। पीजीआई में भर्ती होने के दौरान नियमित तौर पर योग, व्यायाम, मेडिटेशन करते थे।
खुद को पॉजिटिव रखने के लिए घर परिवार के साथ ही दोस्तों से बातें किया करते थे। हरीश ने बताया कि इस संकट की घड़ी में उनके मोहल्ले वालों ने एक परिवार की तरह उनकी पत्नी और बेटे की पल-पल मदद की। उनका मानना है कि अपनों के प्यार और सहयोग के बल पर किसी भी समस्या को आसानी से सुलझाया जा सकता है।
माता-पिता और सास ससुर को नहीं दी जानकारी
हरीश ने बताया कि उनके माता-पिता राजस्थान में रहते हैं। पिता हार्ट के मरीज हैं, वहीं ससुर भी काफी वृद्ध हैं। उनकी स्थिति को देखते हुए उन्होंने और उनकी पत्नी ने उनके कोरोना पॉजिटिव होने की सूचना उन्हें नहीं दी। हरीश का कहना था कि कोरोना को लेकर जिस तरह से सूचनाएं प्रसारित हो रही हैं, उससे लोगों के मन में खौफ घर कर गया है।
ऐसी स्थिति में अगर मेरे दूर रहने पर मेरे माता-पिता और सास-ससुर तक मेरे संक्रमित होने की सूचना पहुंचती तो वह तनाव में चले जाते हैं। उनकी तबीयत बिगड़ सकती थी इसलिए हमने उन तक यह सूचना नहीं पहुंचने दी। मेरी रिपोर्ट निगेटिव आने और पीजीआई से घर लौटने पर उन्हें इसकी जानकारी दी गई।
हरीश का कहना है कि कोरोना से जंग जीतने में समझदारी भी बेहद जरूरी है ताकि इससे किसी अपने को किसी प्रकार का कोई नुकसान न पहुंचने पाए।