वहीं कैप्टन के बयान पर राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि मुख्यमंत्री द्वारा पंजाब और देश के संबंध में जो आशंका जताई जा रही है, वह डॉ. शंकर प्रिंजा का आंकलन है। डॉ. प्रिंजा पीजीआई में कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के हेल्थ इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर और स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर हैं।
मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल द्वारा ट्वीट कर बताया गया कि डॉ. प्रिंजा और उनकी टीम को पंजाब का डाटा दिया गया। उन्होंने इस डाटा के साथ मानक गणितीय मॉडल का उपयोग करते हुए आंकलन उपलब्ध कराया है।
जब तक रिसर्च तय मानकों के अनुसार पूरी न हो जाए, उसकी जानकारी नहीं दी जाती: पीजीआई
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का कोरोना प्रभावित की संख्या जुलाई-अगस्त में बढ़ने संबंधी बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसकी जानकारी पीजीआई प्रशासन को मिली तो उसने कम्युनिटी मेडिसिन एंड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट से जानकारी मांगी। विभाग के प्रमुख ने बताया कि उनके विभाग में इससे जुड़ी कोई रिसर्च नहीं चल रही है। इसके अलावा न ही उनके विभाग के किसी डॉक्टर ने किसी मीडिया या अन्य किसी को भी इससे जुड़ा कोई बयान दिया है।
पीजीआई प्रवक्ता डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि पीजीआई एक शोध संस्थान है। यहां सैकड़ों शोध कार्य होते रहते हैं। लेकिन जब तक कोई रिसर्च तय मानकों के अनुसार पूरी न हो जाए, उससे जुड़ी जानकारी किसी को नहीं दी जाती। अगर कोई उसे बाहर साझा भी कर ले तो वे मान्य नहीं होती। जहां तक कोरोना वायरस को लेकर भारत में उसके संक्रमण की स्थिति पर की रिसर्च की बात है तो ऐसा कुछ फिलहाल पीजीआई के किसी डिपार्टमेंट में नहीं चल रहा।