सूत्रों के अनुसार, शहर की 23 वर्षीय युवती जो कि पिछले रविवार को लंदन से चंडीगढ़ पहुंची थी, उसके संपर्क में आने की वजह से ही एनपी शर्मा के बेटे को जीएमसीएच-32 के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है। हालांकि खबर लिखे जाने तक उनमें कोरोना वायरस की पुष्टि नहीं हुई है। बेटा एनपी शर्मा के साथ ही रहता था, इसलिए उन्हें भी कोरेंटाइन किया गया है। यहीं नहीं, नगर निगम के अधिकारियों में इस बात को लेकर भी खलबली मची हुई है क्योंकि बीते दिनों में एनपी शर्मा कई अधिकारियों और लोगों से मिले हैं।
आइसोलेशन ही सबसे बेहतर तरीका : डॉक्टर
जानकारों का कहना है कि कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को आइसोलेशन के जरिए ही कम किया जा सकता है क्योंकि पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में आने से दूसरे व्यक्ति को भी संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में आइसोलेशन ही बचाव का सबसे सही तरीका है। इस बारे में डॉक्टर्स का कहना है कि सभी मरीजों को विशेष ध्यान यानी इंटेसिव केयर की जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन सभी को एहतियातन आइसोलेट करना पड़ेगा। कोरेंटाइन में उन व्यक्तियों को रखा जाता है जिनमें बीमारी के संकेत दिख रहे हों या फिर वो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हों, लेकिन वह स्वस्थ दिख रहे हों।