चंडीगढ़। कोरोना की मार जनता, व्यापार के साथ मंदिरों पर भी पड़ी है। बेशक अनलॉक 1.0 के बाद से मंदिर खुल गए हैं पर अभी भी वायरस के डर के कारण भक्त मंदिरों में नहीं आ रहे हैं। अब जब भक्त मंदिरों में नहीं आ रहे हैं तो मंदिरों के दान पात्र भी खाली हैं। दान पात्रों के खाली रहने के कारण अब मंदिर प्रबंधकों को खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। इस कारण उन्होंने प्रशासन से बिजली-पानी का बिल माफ करने की मांग की है।
मंदिर प्रबंधकों का कहना है कि यदि दो महीने और इसी तरह से चलता रहा तो मंदिरों पर घोर आर्थिक संकट आ जाएगा। उनका कहना है कि जिस प्रकार से लॉकडाउन के दौरान उन्होंने जरूरतमंदों की सेवा की। उसी तरह से चंडीगढ़ प्रशासन भी अब पहल करते हुए आर्थिक संकट बिजली-पानी का बिल माफ करे। उन्होंने कहा कि भक्त मंदिर में नहीं आ रहे हैं। इस कारण आमदनी नहीं है पर खर्च उतना ही है। ऐसे में धार्मिक संस्थाओं पर संकट का समय आ गया है।
कोरोना से निपटने के लिए धार्मिक संस्थाओं को सहयोग दे प्रशासन
सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर को संचालित करने वाली संस्था श्री कृष्ण भक्त आश्रम मंडल के अध्यक्ष राकेश पाल मोदगिल का कहना है कि संकट का समय है। ऐसे में प्रशासन सभी धार्मिक संस्थाओं के बिजली-पानी का बिल माफ करे ताकि वे संभल सकें।
सेक्टर-29 के श्री बाबा बालक नाथ मंदिर के प्रधान विनोद कुमार चड्ढा ने बताया कि लॉकडाउन में सेवा के लिए मंदिर ने पांच लाख रुपये की एफडी तुड़वा दी थी। अब प्रशासन को चाहिए कि धार्मिक संस्थाओं पर संकट आया है तो वह उनके साथ खड़ा हो।
साईं मंदिर सेक्टर-29 के महासचिव मनीष गुप्ता ने बताया कि प्रशासन को बिजली-पानी का बिल माफ करने पर तुरंत फैसला लेना चाहिए। इससे मंदिर प्रबंधकों को काफी सहायता मिलेगी और वे कोरोना के इस बुरे दौर में इससे निपट सकेंगे।
सेक्टर-8 के प्राचीन शिव मंदिर के प्रधान एचएस लक्की का कहना है कि प्रशासन अपना दिल बड़ा करके दिखाए। हम सभी मंदिर प्रबंधकों ने लॉकडाउन के दौरान खूब सेवा की। अब प्रशासन की बारी है। देखते हैं कि प्रशासन धार्मिक संस्थाओं के लिए क्या करता है।