चंडीगढ़ में कोरोना धीरे-धीरे अपने पैर पसार रहा है। शहर में वर्तमान में कोरोना के 5 सक्रिय मामले हैं, जबकि दो लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। पीजीआई में आईसीयू बेड और हाई डिपेंडेंसी यूनिट को सक्रिय कर दिया गया है। पंजाब में मास्क पहनने की सलाह के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने भी लोगों को सतर्क रहने की अपील की है।
देश के कई राज्यों में पिछले करीब एक महीने से कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 15 जून को कुल 7383 एक्टिव मामले थे। पिछले 24 घंटे में 17 नए लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है, वहीं 10 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। केरल, गुजरात, महाराष्ट्र जैसे राज्य संक्रमण की इस लहर से सबसे ज्यादा प्रभावित देखे जा रहे हैं।
चंडीगढ़ में भी कोरोना के केस धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अभी डरने या घबराने की जरूरत नहीं है। लोगों को सिर्फ सावधान रहने की जरूरत है। पीजीआई के रिसर्च डीन और इंटरनल मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रो. संजय जैन ने कहा कि नए वेरिएंट बहुत घातक नहीं हैं, लेकिन सतर्कता जरूरी है। खासकर कमजोर लोगों की सुरक्षा के लिए ध्यान देना ज्यादा जरूरी हो जाता है। पीजीआई संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। ऑक्सीजन आपूर्ति प्रणाली, वेंटिलेटर और अन्य जीवन रक्षक उपकरणों की जांच की गई है और गंभीर मामलों में वृद्धि होने की स्थिति में उन्हें तैयार रखा गया है।
जीएमसीएच 32 में भी 12 बेड का वार्ड तैयार
जीएमसीएच 32 में 12 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार कर लिया गया है। इन्हें जरूरत के हिसाब से बढ़ाया जा सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि अभी कोरोना से घबराने की जरूरत नहीं है। यदि मरीज ज्यादा आते हैं तो वेरिएंट की जांच की जाएगी। अभी सावधानी बरतने की जरूरत है। खांसी, खांसी, जुकाम, तेज बुखार होने पर आइसोलेट रहें।
अस्पताल या भीड़भाड़ वाली जगह पर पहनना चाहिए मास्क
पंजाब सरकार ने लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे दी है लेकिन चंडीगढ़ में आधिकारिक तौर पर प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे निर्देश जारी नहीं किए हैं। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि लोगों को अस्पताल में जाने, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनना चाहिए। इससे कोरोना होने की संभावना खत्म हो जाएगी। बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, नाक बह रही हो या दस्त हो तो डॉक्टर को दिखाने में देरी न करें। डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या स्टेरॉयड लेने से बचें। बुजुर्ग लोग, अन्य स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोग और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों को भीड़ से दूर रहना चाहिए और हाथों की उचित स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए।
28 मई को जीएमसीएच 32 में हुई थी मौत
जीएमसीएच-32 में 28 मई को कोरोना के पहले मरीज की मौत हो गई थी। 40 वर्षीय मरीज राजकुमार लुधियाना में रहकर नौकरी करता था। हालांकि, वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद का रहने वाला था। वह अपने घर गया था तो वहां से वापस आकर उसे पेट की दिक्कत हुई। लुधियाना के सिविल अस्पताल में इलाज न होने के बाद उन्हें 32 शिफ्ट कर दिया गया था। मरीज को बुखार हो रहा था, जिसके कारण उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी। जांच के बाद कोरोना की पुष्टि हुई। बाद में इलाज के दौरान मरीज ने दम तोड़ दिया था।