डॉ. बेदी का कहना है कि कोरोना संक्रमण की पहली लहर में विदेश में हुई मौत पर गौर करें तो मृत्यु दर 15 प्रतिशत थी, जबकि भारत में यह महज 2 प्रतिशत रही। इसका मुख्य कारण भारत में युवाओं की संख्या ज्यादा होना है जबकि विदेश में युवाओं की तुलना में बुजुर्गों की संख्या ज्यादा है लेकिन धीरे-धीरे भारत में भी अन्य आयु वर्ग के लोग संक्रमण की चपेट में तेजी से आ रहे हैं, जिसके कारण मौत का आंकड़ा भी बढ़ रहा है।
टीकाकरण ही हथियार
स्वास्थ्य निदेशक डॉ. अमनदीप कंग का कहना है कि संक्रमण के साथ ही अगर हो रही मौतों पर काबू पाना है तो जल्द से जल्द टीकाकरण करवाना होगा। डॉ. कंग ने बताया कि 45 से ज्यादा उम्र के लोगों में संक्रमण के खतरे को ध्यान में रखते हुए ही सरकार ने सबसे पहले इस वर्ग का टीकाकरण शुरू किया था। अब भी इस वर्ग के लाभार्थियों को टीकाकरण में युवाओं की तुलना में ज्यादा तवज्जो दी जा रही है।
शहर में कोरोना से अब तक हुई मौतें
आयु वर्ग कुल मौतें
0 से 10 साल 5
11-20 साल 6
21-30 साल 17
31-40 साल 43
42-50 साल 94
51-60 साल 168
61-70 साल 149
71-80 साल 151
81 से ज्यादा 81
(2020 व 25 मई 2021 तक का आंकड़ा)
वर्ष 2020 और 2021 का अब तक का आंकड़ा देखा जाए तो 51 से 60 साल के बीच वाले कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत सबसे ज्यादा हुई है। इससे यह पता चल रहा है कि कोरोना संक्रमण इस उम्र के लोगों के लिए सबसे ज्यादा घातक सिद्ध हो रहा है। - डॉ. अमनदीप कंग, स्वास्थ्य निदेशक