विवेक त्रिवेदी ने बताया कि कोरोना से बचाव का सबसे बेहतर माध्यम था कि लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जाए। कमिश्नर व मेयर के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में 2 से 3 हजार परिवारों के बच्चों को 15 सौ किलो च्यवनप्राश वितरित किया ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी रहे। इसके अलावा एक हजार किलो रेडी टू ईट सामग्री बच्चों और महिलाओं में बांटी गईं। इस सामग्री में गर्म पानी डालने पर यह साथ ही खाने के लिए तैयार हो जाती है।
रेखा त्रिवेदी ने की गरीब महिलाओं की सेवा
उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी रेखा त्रिवेदी ने जीरकपुर की झुग्गियों में रहने वाली महिलाओं को सेनेटरी पैड, मास्क और सैनिटाइजर वितरित किए। साथ ही छोटे बच्चों को दूध व सेरेलेक उपलब्ध कराया।
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चार साल के बेटे को संभालते थे दादा
विवेक त्रिवेदी ने एक बेटे को गोद लिया है। इसकी उम्र चार साल है। पति-पत्नी जब लोगों की सेवा करेंगे तो बच्चे को कौन संभालेगा, यह बड़ा सवाल था। तब विवेक त्रिवेदी के पिता ने कहा तुम समाज की सेवा करो, नाती को संभालने की जिम्मेदारी मेरी है। यह सुनते ही जैसे पति- पत्नी एक बड़ी विडंबना से मुक्त हो गए। दोनों सुबह 6 बजे घर से निकलते थे। रात को घर आकर अच्छे से सैनेटाइज होकर फिर बेटे को भी समय देते थे।