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कोरोना कमांडोः जज्बे को सलाम, एक्सीडेंट का दर्द भूलकर महामारी से जंग में जुटी अमनप्रीत कौर

Thu, 04 Jun 2020 01:47 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
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कोरोना कमांडो अमनप्रीत - फोटो : अमर उजाला
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बचपन में परियों की कहानियां सुना करती थी तो हमेशा मन में एक की ख्याल आता था कि मैं भी दूसरों के दुख और कष्ट पल भर में दूर कर दूंगी। फिर क्या था पढ़ाई लिखाई पूरी करने के बाद नर्सिंग किया और उसके बाद से इसी क्षेत्र में अपना कॅरिअर शुरू कर दिया।
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ये कहना है जीएमएसएच 16 की स्टाफ नर्स अमनप्रीत कौर का जो लगातार ढाई महीने से कोविड वार्ड में ड्यूटी कर रही हैं। अमनप्रीत ने बताया कि कोरोना महामारी फैलने से कुछ दिन पहले ही मेरी रोड एक्सीडेंट में बैक फ्रेक्चर हुई थी। घरवालों ने समझाया कि कुछ दिन आराम कर लो। लेकिन मेरे लिए वह क्षण अपने बारे में सोचने की बजाय मरीजों के बारे में सोचने का था।

इसलिए मैंने तय किया कि मैं परिवार से दूर अस्पताल में रहकर अपने दर्द को भूलकर कोरोना के मरीजों की देखभाल में पूरी लगन और मेहनत से जुट जाऊंगी। मार्च में जब जीएमएसएच-16 में कोरोना का पहला पॉजिटिव मरीज भर्ती हुआ तो मुझे उस वार्ड में ड्यूटी मिली। तब से आज तक बिना छुट्टी लिए लगातार ड्यूटी कर रही हूं।
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डॉक्टरों ने दी आराम करने की सलाह, पर मन नहीं माना

अमन को होली के अगले दिन हॉस्पिटल आते समय रास्ते में कार ने टक्कर मारी और वह घायल हो गई। इलाज के दौरान पता चला कि उन्हें बैक फैक्चर हो गया है। डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी। अमन छुट्टी लेकर घर पर आराम करने भी लगी, लेकिन उसी दौरान देश में कोरोना फैलने की खबर सामने आने लगी। चंडीगढ़ में भी इसे लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया।

अमन को इस दौरान खुद का आराम करना ठीक नहीं लगा और उन्होंने हॉस्पिटल जाने का निश्चय किया। मां ने बहुत समझाया, लेकिन अमन के लिए अपने कर्तव्य से बढ़कर कुछ भी नहीं था। पिता ने अपनी बहादुर बेटी का मनोबल बढ़ाया और उन्हें डटकर मुकाबला करने को कहा। माता-पिता के आशीर्वाद और छोटे भाई बहनों के प्यार के बल पर ही अमन अपने दर्द को भूलकर कोरोना के मरीजों का दर्द दूर करने में जुटी हुई हैं। 

ये जीवन बहुत कीमती है, इसे ऐसे नहीं गंवाना
अमनप्रीत अस्पताल के ही हॉस्टल में ढाई महीनों से ठहरी हुई है। 25 मई को उन्होंने घर जाने की बजाय हॉस्पिटल में ही अपने सहयोगियों के बीच अपना बर्थडे भी मनाया। अमन का कहना है कि ईश्वर ने हमें मानव जीवन दिया है तो हमें उसकी कीमत समझनी चाहिए। व्यर्थ में इस जीवन को गंवाने का कोई मतलब नहीं है। अगर हमें कोरोना महामारी जैसे जंग में योगदान देने का अवसर मिला है तो खुद की जान की परवाह किए बिना अपनी जिम्मेदारी पूरी करनी चाहिए। अमन की इस सोच के कारण ही वह अपने सहयोगियों के साथ ही सभी सीनियर की चहेती हैं।
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