जिला एवं सत्र न्यायधीश अरुण वशिष्ठ की अदालत ने अपनी पत्नी और दो बच्चों समेत चार हत्याओं के दोषी को फांसी और उसकी साथी (अब पत्नी) को उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामला 20 जून 2015 का है। जिला अटार्नी नवदीप गिरधर और बचाव पक्ष के वकील मनजिंदर सिंह बराड़ ने बताया कि गांव अटारी के जमींदार पलविंदर सिंह के उसके खेत में काम करने वाले निर्मल सिंह की पत्नी करमजीत कौर के साथ संबंध थे।
इनमें निर्मल सिंह और पलविंदर की पत्नी सरबजीत कौर बाधा बन रहे थे। इस पर आरोपियों ने निर्मल सिंह, सरबजीत कौर के साथ-साथ पलविंदर के दोनों बच्चों जश्नप्रीत सिंह (4) और गगनदीप कौर (6) को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। योजना के अनुसार, पलविंदर सिंह ने घटना से 11 दिन पहले अपनी पत्नी सरबजीत कौर के नाम से दो बीमा पॉलिसी और निर्मल सिंह के नाम से भी दो बीमा पॉलिसी खरीदी।
इसके अलावा पलविंदर सिंह ने एक पुरानी मारुति कार खरीदी। 20 जून 2015 को योजना के अनुसार, दवा दिलाने के बहाने पलविंदर अपनी पत्नी सरबजीत कौर, दोनों बच्चों और निर्मल सिंह को कार में बैठाकर ले गया। इस दौरान उसने अचानक कार को गंग नहर की ओर मोड़ दिया। कार नहर में समा गई और आरोपी की पत्नी, दोनों बच्चों और निर्मल सिंह की डूबने से मौत हो गई थी।
हीं, आरोपी खुद खिड़की खोलकर तैरकर बाहर आ गया और कुछ देर बाद शोर मचाकर लोगों को एकत्र किया। इसके बाद उसने सोची-समझी साजिश के तहत इन हत्याओं को दुर्घटना का नाम देने का प्रयास किया। लेकिन उसके साले गुरनिशान सिंह की शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी। बीमे की बात का पता चलने पर पुलिस ने उसके खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया।
इसके बाद 27 जनवरी 2016 को पलविंदर सिंह और करमजीत कौर ने शादी करवाकर अदालत में प्रोटेक्शन पिटीशन भी दायर की। इसके बाद पुलिस का शक और गहरा गया। पूछताछ में उसने अपना जुर्म कुबूल लिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने केस को अति दुर्लभ (रेयरेस्ट ऑफ रेयर) मानते हुए पलविंदर सिंह को फांसी की सजा सुनाई। साथ ही करमजीत कौर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।