चंडीगढ़ एव बेस्ड वर्कर्स यूनियन और ट्राइसिटी राइडर्स वेलफेयर सोसाइटी ने नगर निगम से फैसले पर पुनर्विचार की मांग की
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। चंडीगढ़ में नई पार्किंग पॉलिसी लागू होने के बाद जोमेटो और स्विगी से जुड़े डिलीवरी कर्मियों से पार्किंग शुल्क वसूलने के मामलों पर विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर चंडीगढ़ एव बेस्ड वर्कर्स यूनियन और ट्राइसिटी राइडर्स वेलफेयर सोसाइटी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। यूनियन ने पार्किंग पॉलिसी लागू होते ही शहर के अलग-अलग सेक्टरों में डिलीवरी वर्करों और पार्किंग स्टाफ के बीच टकराव के चार मामले सामने आए। सेक्टर-9 के एक रेस्टोरेंट से ऑर्डर लेने पहुंचे डिलीवरी बॉय को पार्किंग शुल्क देने के लिए रोका गया। मौके पर मौजूद स्टाफ ने कथित तौर पर कहा कि ऊपर से निर्देश हैं कि सभी डिलीवरी एजेंटों को शुल्क देना होगा, तभी उन्हें अंदर जाने और ऑर्डर उठाने की अनुमति दी जाएगी। इस घटना का वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया है।
इसी तरह सेक्टर-17 और सेक्टर-22 की मार्केट में भी डिलीवरी कर्मियों को ऑर्डर पिकअप और डिलीवरी के दौरान पार्किंग शुल्क देने के लिए रोके जाने की शिकायतें सामने आई हैं। यूनियन के प्रधान साहिल कुमार का कहना है कि एक ही डिलीवरी के लिए वर्करों को दो बार पार्किंग शुल्क देना पड़ रहा है। पहली बार रेस्टोरेंट से ऑर्डर उठाते समय और दूसरी बार ग्राहक तक पहुंचते समय। यूनियन प्रतिनिधियों ने कहा कि गिग वर्कर पहले ही पेट्रोल, वाहन रखरखाव, किस्तों और स्वास्थ्य खर्चों का बोझ उठाते हैं। ऐसे में अतिरिक्त पार्किंग शुल्क उन पर अनावश्यक आर्थिक दबाव डालता है। यूनियन ने नगर निगम और प्रशासन से इस नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
निगम कमिश्नर से डिलीवरी को पार्किंग में छूट देने की मांग
साहिल कुमार ने कहा कि पहले ही गलत नीतियों और ज्यादा टैक्स के चक्कर में लोगों ने अपना रोजगार खो कर डिलीवरी वर्कर बन गए अब यहां भी उनका शोषण लगातार हो रहा है। यदि फैसला वापस नहीं लिया गया तो धरना प्रदर्शन और कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया जाएगा।