पंजाब में डीजीपी के पद पर अपने से जूनियर अधिकारी दिनकर गुप्ता की नियुक्ति के खफा डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा अगले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट में यूपीएससी के फैसले को चुनौती देंगे। वहीं मुख्यमंत्री से की गई अपील के बाद मुस्तफा को नशे के खिलाफ गठित एसटीएफ के प्रमुख पद से हटा दिया गया। अब वे केवल पंजाब मानवाधिकार आयोग के डीजीपी का पदभार ही संभालेंगे।
दरअसल नियमानुसार किसी जूनियर अधिकारी को उच्च पद पर आसीन किए जाने की स्थिति में सीनियर अधिकारी उन्हें रिपोर्ट नहीं करते। मोहम्मद मुस्तफा और दिनकर गुप्ता के बीच भी यही स्थिति बनी है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने मुस्तफा का आग्रह मानते हुए उन्हें एसटीएफ के पदभार से मुक्त कर दिया, क्योंकि इस पद पर रहते हुए मुस्तफा को डीजीपी दिनकर गुप्ता को रिपोर्ट करनी पड़ती।
वहीं पंजाब मानवाधिकार आयोग के डीजीपी के रूप में वे सीधे सरकार को रिपोर्ट करेंगेमोहम्मद मुस्तफा ने शुक्रवार को बताया कि उन्होंने यूपीएससी द्वारा तैयार पैनल संबंधी दस्तावेज प्राप्त करने के लिए आवेदन किया है। जैसे ही यह दस्तावेज उन्हें मिल जाएंगे, वे यूपीएससी के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
उल्लेखनीय है कि मुस्तफा इस बात पर आपत्ति जता रहे हैं कि यूपीएससी ने डीजीपी पद के लिए पैनल घोषित करते हुए उनकी सीनियोरिटी को ध्यान में क्यों नहीं रखा। इसके अलावा यूपीएससी ने 1984 बैच के अधिकारियों को अनदेखा कर 1987 बैच के अधिकारियों को ही तरजीह दी। उधर, डीजीपी पद के एक अन्य दावेदार आईपीएस अधिकारी संजीव चट्टोपाध्याय इन दिनों शहर में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे चंडीगढ़ लौटने के बाद इस संबंध में दस्तावेजों की पड़ताल करेंगे। अगर जरूरी हुआ तो मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाया जाएगा।