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सिख पंथ के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ, पर क्यों?

Fri, 23 Oct 2015 11:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़/अमृतसर
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सिख पंथ के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि अकाल तख्त और पंज प्यारों में टकराव की स्थिति बनी, वो भी राम रहीम के कारण। मामला गुरमीत राम रहीम को श्री गुरू गोबिंद सिंह जी की तरह स्वांग रचने के केस में माफी देने का है। पहले अकाल तख्त ने राम रहीम को माफी दे दी, जिसका सिखों ने विरोध किया।
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बवाल और हंगामा देखते हुए अकाल तख्त ने माफी का फैसला वापिस ले लिया। माफी को लेकर पंज प्यारों ने पांचों जत्थेदारों को तलब किया। ऐसा पहली बार हुआ था। इतना ही नहीं इसके छह घंटे के भीतर ही एसजीपीसी ने पंज प्यारों को निलंबित कर दिया। इस तरह की कार्रवाई भी पहली बार हुई है।

एक दिन बाद स्थिति यह है कि पंज प्यारे अपनी बात पर अड़े हैं कि जत्थेदारों को पेश होना होगा। अगर नहीं होते तो वे इसके लिए पंथ के आगे जवाबदेह होंगे। उन्होंने एसजीपीसी अध्यक्ष को भी सचेत किया है कि वह कोई भी फैसला करते वक्त ध्यान रखें कि उनकी जवाबदेही धर्म के प्रति है।
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मक्कड़ ही लेंगे पंज प्यारों पर फैसला

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को माफीनामे के विवाद में सिंह साहिबान को तलब करने वाले पंज प्यारों के निलंबन मसले पर अब एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ही कोई फैसला लेंगे।

यह निर्णय वीरवार को हुई एसजीपीसी कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया। पंज प्यारों के निलंबन के बाद से ही पंथक जत्थेबंदियों ने कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया था। इसी वजह से वीरवार को कार्यकारिणी की बैठक बुलानी पड़ी।

बैठक में मंथन के बाद इस बात पर एक राय बनी कि पंज प्यारों का निलंबन जारी रहेगा या वापस होगा, इस पर एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ही कोई निर्णय लेंगे। उधर, मक्कड़ ने कहा है कि मामले में अंतिम निर्णय तीन से चार दिन के अंदर ले लिया जाएगा।  

मीटिंग में कार्यकारिणी के गैर शिअद सदस्य भी आए

सेक्टर-27 स्थित कलगीधर निवास पर साढ़े तीन घंटे चली मीटिंग में कार्यकारिणी के गैर शिअद सदस्यों ने भी हिस्सा लिया। बैठक में शिअद से ताल्लुक रखने वाले दो सदस्यों ने भी निलंबन को गलत ठहराया। कहा कि सिख संगत की भांति एसजीपीसी कर्मचारियों में भी इस कार्रवाई के खिलाफ रोष है।

गैर शिअद सदस्य भजन सिंह शेरगिल व मंगल सिंह ने मीटिंग में मुद्दा उठाया कि डेरा प्रमुख को माफीनामे के बाद पूरे सिख कौम में रोष था और एसजीपीसी के अपने कर्मचारी भी विरोध प्रदर्शन पर उतर आए थे। वह भी सिख हैं, लिहाजा कर्मचारियों को निलंबित नहीं किया जाना चाहिए।

साथ ही पंज प्यारों के निलंबन का फैसला रद्द करने की मांग की। शिअद के करनैल सिंह पंजोली और शिअद की सदस्यता से इस्तीफा देने वाले सुखदेव सिंह भौर ने भी निलंबन रद्द करने का सुझाव रखा।

शांति कायम रखने के उपायों पर भी मंथन
बैठक में अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। बेअदबी की घटना के बाद प्रदर्शन के तहत सड़कों पर उतरी सिख संगत को शांत करने और सड़कें जाम करने का सिलसिला बंद करने के उपायों पर भी चर्चा हुई। सदस्यों ने सुझाव रखा कि प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रही पंथक शख्सियतों से कार्यकारिणी सदस्य स्वयं जाकर मुलाकात करें और उन्हें समझाने की कोशिश करें। हालांकि इन सुझावों पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका। कार्यकारिणी की यह पहली ऐसी मीटिंग रही, जिसमें 15 में से 13 सदस्य मौजूद थे।

अंदर मीटिंग, बाहर विरोध
शिअद मान व शिअद युनाइटेड ने एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ का विरोध किया। कलगीधर निवास के बाहर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने काले झंडे दिखाकर मक्कड़ का विरोध किया। शिअद युनाइटेड के गुरनाम सिंह सिद्धू व शिअद मान गुट के सदस्यों ने हाथों में मक्कड़ विरोधी नारों वाली तख्तियां पकड़ी हुई थीं। यह विरोध करीब 20 मिनट तक चला । हालांकि नारेबाजी के बाद दोनों दलों के समर्थक वापस लौट गए।

जत्थेदारों को तलब करने की कार्रवाई पर पंज प्यारे अडिग

एसजीपीसी की तरफ से निलंबित पंज प्यारे पांच तख्तों के जत्थेदारों के खिलाफ शुक्रवार को श्री अकाल तख्त साहिब से कार्रवाई करके लिए पूरी तरह अडिग है। पदों से निलंबन के बावजूद पंज प्यारे जत्थेदारों को तलब करने की कार्रवाई से संतुष्ट है। वीरवार को पंज प्यारे श्री अकाल तख्त साहिब पर माथा टेकने पहुंचे।

एसजीपीसी के श्री दरबार साहिब के मैनेजर प्रताप सिंह अन्य पदाधिकारियों के साथ उनकी पूरी निगरानी रख रहे थे। पंज प्यारों में से एक सतनाम सिंह ने कहा कि वह शुक्रवार सुबह दस बजे श्री अकाल तख्त साहिब पर पांचों जत्थेदारों का गुरु मर्यादा के अनुसार इंतजार करेंगे।

अगर जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब पर पेश नहीं होते हैं तो फिर वे गुरु मर्यादा के अनुसार ही जत्थेदारों के खिलाफ अगली कार्रवाई करेंगे। एसजीपीसी ने उनको निलंबित किया है, इस पर उन्होंने कहा कि इसका जवाब एसजीपीसी ही सिख कौम को देगी कि क्या उनका निलंबन ठीक है या नहीं। वह गुरु मर्यादा के अनुसार अपनी अगली कार्रवाई करेंगे।

एसजीपीसी ने बिना सोचे और जल्दबाजी में पांच प्यारों को निलंबित करने का फैसला लिया है। पांच प्यारों ने गुरु मर्यादा के अनुसार ही काम किया है।
- ज्ञानी जोगिंदर सिंह वेदांती, पूर्व जत्थेदार, श्री अकाल तख्त साहिब
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पंज प्यारों का रुख एसजीपीसी के लिए कड़ी परीक्षा

डेरा प्रमुख को माफी देने पर पांचो तख्तों के जत्थेदारों को पंच प्यारों के तलब करने से टकराव की जो स्थिति पैदा हुई है, वह शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के लिए कड़ी परीक्षा साबित होने वाली है।

सिख समुदाय का एक बड़ा हिस्सा यह मानता है कि एसजीपीसी कई बड़े फैसले कुछ लोगों के राजनीतिक हानि-लाभ को ध्यान में रखकर करती रही है। यह वर्ग डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को माफी देने के फैसले को उचित नहीं मानता। इसलिए पंज प्यारों द्वारा जत्थेदारों को तलब करने के फैसले से खुश है। उसकी नजर में जत्थेदारों का फैसला और उसके बाद एसजीपीसी द्वारा पंज प्यारों को निलंबित करना महज कुछ लोगों को खुश करने का प्रयास है। यह काम पंथ के अनुरूप नहीं है।

समुदाय के इन लोगों को लग रहा है कि ऐसे समय में पंज प्यारे ही अपनी पंथक ड्यूटी निभा रहे हैं। यही वजह है कि जत्थेदारों को निलंबित करने का फैसला कर एसजीपीसी खुद सहज नहीं है। पंज प्यारों का निलंबन वापस लेने के लिए एसजीपीसी के कई सदस्य ही दबाव बना रहे हैं। एसजीपीसी की वर्किंग कमेटी की चंडीगढ़ में हुई बैठक में भी यह बात सामने आई।

अब क्या होगा
इस सारे विवाद में कई सवाल खड़े हुए हैं। पहला सवाल यह है कि क्या पांचों तख्तों के जत्थेदार शनिवार को पंज प्यारों के कहने पर संगत के आगे पेश होंगे या नहीं? दूसरा सवाल यह है कि अगर जत्थेदार पेश होते हैं तो क्या वे अपने पद से इस्तीफा देकर साधारण व्यक्ति की तरह पेश होंगे या पद सहित?

तीसरा सवाल यह है कि क्या एसजीपीसी जत्थेदारों को पंज प्यारों और संगत के आगे पेश होने से रोकेगी? अगर वह रोकती है तो मर्यादा उल्लंघन का सवाल खड़ा हो सकता है। अगर नहीं रोकती तो एसजीपीसी के दबदबे में कमी आएगी।
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