यौन उत्पीड़न प्रकरण में मुख्य गवाह पर हमले के मामले में नारायण साईं को पानीपत लाने को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना बताते हुए पुलिस पर कार्रवाई की मांग की गई है।
हरियाणा पुलिस की ओर से नारायण साईं के हासिल किए प्रोडक्शन वारंट को रद्द करने के लिए याचिका दायर हुई थी और हाईकोर्ट ने प्रोडक्शन वारंट के क्रियान्वयन पर रोक लगाई थी।
हाईकोर्ट ने रोक के साथ पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा था। मामले की सुनवाई में नारायण साईं की ओर से अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया गया कि हाईकोर्ट से नारायण साईं के प्रोडक्शन वारंट पर रोक लगने के बावजूद उसे गुजरात जेल से हिरासत में लेकर पानीपत लाया गया।
यह हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना है। उधर, सरकार ने अपने जवाब में कहा कि नारायण साईं को लेने के लिए पुलिस पार्टी रवाना हो चुकी थी और पानीपत लाने तक आदेश प्राप्त नहीं हुए थे। हालांकि, इसका नारायण साईं की वकील ने विरोध करते हुए कहा कि आदेश सभी संबंधित अधिकारियों को फैक्स के माध्यम से भेजे थे।
उक्त मामले में हरियाणा पुलिस ने पानीपत जिला अदालत से 15 जनवरी को नारायण साईं के प्रोडक्शन वारंट हासिल किए थे और उसे 10 फरवरी को हरियाणा लाकर अदालत में पेश किया जाना था। इस वारंट को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी और हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी।
इस रोक के बावजूद नारायण साईं को पानीपत अदालत में पेश किया गया और पुलिस ने यहां पुलिस हिरासत की मांग नहीं की थी। उसे न्यायिक हिरासत में करनाल जेल भेज दिया गया था। मामले में याचिका दाखिल करते हुए नारायण साईं ने कहा था कि यौन उत्पीड़न मामले में उनके खिलाफ गवाह रहे महेंद्र चावला पर हुए हमले के मामले में हरियाणा पुलिस उन्हें प्रोडक्शन वारंट पर पानीपत लाना चाहती है।