-फाजिल्का, फिरोजपुर, मोगा और पटियाला जिलों में सामुदायिक जल शोधन संयंत्र लगाएगी सरकार
-पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनजीटी में सबमिट की रिपोर्ट, बठिंडा व फरीदकोट भी झेल रहे मार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब में दूषित भूजल के कारण कैंसर का खतरा बढ़ता जा रहा है। पंजाब के चार जिलों के नौ क्षेत्र भूजल में यूरेनियम की अधिक मात्रा से प्रभावित हैं। भूजल में मिला यूरेनियम बीमारियों का न्योता दे रहा है। मालवा क्षेत्र इससे बुरी तरह से प्रभावित है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार फाजिल्का, फिरोजपुर, मोगा और पटियाला में सामुदायिक जल शोधन संयंत्र लगाने जा रही है ताकि लोगों के लिए पीने के साफ पानी की वैकल्पिक व्यवस्था की जा सके। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में इसे लेकर रिपोर्ट सबमिट की है। बठिंडा और फरीदकोट पहले से ही कैंसर की मार झेल रहे हैं।
बोर्ड ने रिपोर्ट में जानकारी दी कि सामुदायिक जल शोधन संयंत्र लगाने के लिए टेंडर लगाए गए हैं। जब तक इस समस्या का स्थायी हल नहीं हो जाता तब तक वैकल्पिक की जा रही है। जल शक्ति मंत्रालय ने भी राज्य को सलाह दी थी कि जहां यूरेनियम की मात्रा 60 पीपीबी (पार्ट्स पर बिलियन) से अधिक पाई जाती है वहां सामुदायिक आधारित यूरेनियम उपचार संयंत्र स्थापित किए जाएं। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की टीम ने भी राज्य को सलाह दी है कि जहां भूजल के नमूनों में 60 पीपीबी से अधिक यूरेनियम पाया गया है वहां सामुदायिक आधारित यूरेनियम उपचार संयंत्र स्थापित किए जाएं। रिपोर्ट के अनुसार यह एरिया औद्योगिक प्रदूषण से प्रभावित नहीं हैं क्योंकि राज्य में ऐसा कोई उद्योग नहीं है जो भूजल में रेडियोधर्मी संदूषण (रेडियोएक्टिव कंटैमिनेशन) का कारण बन सके लेकिन जल के दूषित होने के अन्य कारण हो सकते हैं।
गंभीर बीमारियों को जन्म दे रहा दूषित पानी
दूषित पानी प्रदेश में गंभीर बीमारियों को जन्म दे रहा है। यूरेनियम जैसे तत्वों की मौजूदगी लंबे समय तक गुर्दे, लिवर और हड्डियों में जाकर गंभीर स्वास्थ्य संबंधी खतरे पैदा कर सकती है। इससे पहले संसदीय समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में नौ जिलों के 32 स्थानों में यूरेनियम की मात्रा अधिक पाए जाने की जानकारी दी थी। इसके बाद ही इनमें से अधिकतर क्षेत्रों में पीने के पानी की वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी। समिति ने भी सामुदायिक जल शोधन प्लांट और घरों में प्यूरिफायर लगाने की सिफारिश की थी।
पानी में भारी धातुओं की मात्रा अधिक
प्रदेश के फतेहगढ़ साहिब, फाजिल्का, फिरोजपुर, मोगा, पटियाला और रोपड़ के पानी में आयरन और नाइट्रेट समेत भारी धातु अधिक मात्रा में हैं। इसी तरह बठिंडा, फरीदकोट, मोगा, मुक्तसर, फिरोजपुर और मानसा में यूरेनियम की अधिक मात्रा है। हालांकि पानी की वैकल्पिक व्यवस्था होने के कारण फिरोजपुर को छोड़कर बाकी जिलों में अधिक खतरा नहीं है। कैंसर के केस बढ़ने के लिए भी यूरेनियम प्रमुख कारण माना जाता है। यह मामला हाईकोर्ट में भी लंबित है। कोर्ट ने यूरेनियम का पता लगाने के लिए मालवा के अलावा पूरे पंजाब में भूजल की जांच के आदेश दिए थे। इसी तरह 17 जिले पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा से बुरी तरह प्रभावित हैं।