प्रदूषण के दुष्प्रभाव बतातीं आईएमए अध्यक्ष डॉ. वनिता गुप्ता व अन्य।
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चंडीगढ़। बढ़ते वायु प्रदूषण और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे इसके प्रभाव पर चर्चा के लिए सोमवार को प्रेस क्लब में स्वास्थ्य सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने वायु प्रदूषण को स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बताया। कहा कि घर के अंदर की दूषित हवा हर साल 20 लाख से अधिक जानें ले रही है। वायु प्रदूषण से कई गंभीर बीमारियों से लेकर मस्तिष्क तक के विकार पैदा हो रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य वायु प्रदूषण के कारण इलाज पर बढ़ते खर्च और उसको कम करने की आवश्यकता पर चर्चा करना था।
जीएमसीएच-32 की मनोचिकित्सक प्रोफेसर प्रीति अरुण का कहना है कि ऐसे कई शोध पत्र हैं, जो दर्शाते हैं कि पर्यावरण प्रदूषण मानव शरीर की संरचना को प्रभावित करता है और अवसाद और चिंता जैसे सामान्य मानसिक विकारों को बढ़ाता है। प्रदूषण में अधिक समय तक रहने वाले लोगों में मनोविकार जैसे गंभीर प्रभाव को व्यापक तौर पर देखा जा रहा है। बच्चों में खासतौर पर अटेंशन डिफिशिएंट हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसका मुख्य कारण प्रदूषण के कणों और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के संपर्क में रहना देखा जा रहा है।
पल्मनोलॉजी के विशेषज्ञ डॉक्टर जफर अहमद ने बताया कि प्रतिवर्ष दुनिया भर में 42 लाख से अधिक मौतों के साथ ही आसपास के माहौल में वायु प्रदूषण कार्डियोपल्मोनरी मौतों का प्रमुख कारण बन गया है। भारत में घर के अंदर का वायु प्रदूषण भी हर साल 20 लाख से अधिक मौतों का कारण बनता है। इनमें से निमोनिया के कारण 44 प्रतिशत, सीओपीडी के कारण 54 प्रतिशत और फेफड़े के कैंसर के कारण 2 प्रतिशत मौतें होती हैं।
पीडियाट्रिक्स और नियोनाटोलॉजी के विशेषज्ञ डॉक्टर दिलजीत सिंह बेदी ने बताया कि डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि वर्ष 2016 में प्रदूषित हवा के कारण होने वाले सांस संबंधी संक्रमण से 6 लाख बच्चों की मृत्यु हुई थी। वायु प्रदूषण से बच्चे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। मौके पर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रीना जैन, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. वनिता गुप्ता, लंग केयर फाउंडेशन और डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर के डॉ. अरविंद कुमार ने भी अपने विचार रखे।