मोहाली में राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सेंट्रल गवर्नमेंट इंप्लाइज वेलफेयर हाउसिंग ऑर्गेनाइजेशन (सीजीइडब्ल्यूएचओ) के खिलाफ फैसला सुनाया है।
आयोग ने मोहाली उपभोक्ता फोरम के फैसले के खिलाफ दायर की गईं करीब 150 याचिकाओं को भी खारिज कर दिया। साथ ही फ्लैटों के पजेशन में प्रोपर सुविधाएं न देने के लिए संस्था को प्रत्येक अलॉटी को 2.25 लाख मुआवजा व 22 हजार रुपये कानूनी खर्च के रूप में चुकाने के आदेश दिए हैं। यह मुआवजा राशि करीब पौने चार करोड़ रुपये बनती है।
इससे पहले नसीब सिंह व 150 के करीब लोगों ने जिला उपभोक्ता फोरम में सीजीईडब्ल्यूएचओ के खिलाफ याचिका दायर की थी। अलॉटियों के वकील पंकज चांदगोठिया ने बताया कि सीजीईडब्ल्यूएचओ ने केंद्रीय विहार के नाम से रेजिडेंशियल फ्लैटों की स्कीम 2006 में निकाली थी।
लोगों को 2007 में अलॉटमेंट लेटर जारी किए गए थे। प्रोजेक्ट 30 महीने में पूरा होना होना था। यह समय अवधि 2009 में पूरी हो गई। उन्होंने बताया कि पजेशन देने की समय अवधि तक प्रोजेक्ट पूरी तरह तैयार नहीं हुआ। जब पजेशन दिया गया तो यह मात्र सांकेतिक था। मूलभूत सुविधाओं का अभाव था।
न तो बिजली के लिए पीएसपीसीएल से मंजूरी ली गई थी। न ही सोसायटी में पार्किंग तैयार की गई थी। वहीं, हाईटेंशन तार भी सोसायटी के ऊपर से गुजर रही थी। जो कि वहां पर रहने वाले लोगों की जान से खिलवाड़ था।
इसके बाद उपभोक्ता अदालत ने सर्विस में कोताही का दोषी ठहराया था। उक्त फैसले के खिलाफ सीजीइडब्ल्यूएचओ ने राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की शरण ली थी।