किसी महिला को चुनाव लड़ना है तो उसे पति, ससुर के साथ ही पूरे परिवार का कर्ज चुकाना होगा। यह उस हालत में करना होगा, जब चुनाव लड़ने के लिए सहकारी बैंक से एनओसी चाहिए।
प्रत्याशी को उन सभी के कर्ज का जिम्मेदार माना जाएगा, जिनके नाम परिवार के राशन कार्ड में दर्ज होंगे। कर्जदार डिफाल्टर होता है तो कर्ज जमा कराने के बाद ही एनओसी मिलेगी। बिजली निगम भी महिला के नाम की एनओसी तभी जारी करेगा, जब कनेक्शन धारक पति, ससुर पूरा बिल जमा करा चुके होंगे।
सरकार ने पंचायत चुनाव लड़ने वालों के लिए ऐसे शर्तें लगाईं है कि लोग उलझने शुरू हो गए हैं। पहले शिक्षा की शर्त को पूरा करने के लिए जोड़तोड़ किया गया तो अब सहकारी बैंक और बिजली निगम से एनओसी लेने की जद्दोजहद चल रही है। परिवार के मुखिया के लिए एनओसी लेना काफी आसान है, जबकि महिलाओं को एनओसी देने में कई नियमों की बाधा भी पार करनी होगी। नियम यह बनाया गया है कि अगर किसी महिला को सहकारी बैंक से एनओसी चाहिए तो उस राशन कार्ड की फोटो कापी जमा करानी होगी, जिसमें उसका नाम है।
सहकारी बैंक के अधिकारी यह देखेंगे कि उस राशन कार्ड में जिनके नाम हैं, उन पर बैंक का कोई कर्ज तो नहीं है और कर्ज है तो वह डिफाल्टर तो नहीं है। अगर महिला के पति, ससुर या अन्य में कोई डिफाल्टर होता है तो उन सभी का कर्ज जमा कराने के बाद ही एनओसी मिलेगी। इस तरह ही बिजली निगम ने नियम बनाया हुआ है। जिस महिला के नाम की एनओसी चाहिए उसके पति के अलावा रहने वाले पते पर यह देखा जाएगा कि कनेक्शन किसके नाम पर लगा है। उन सभी का बिल जमा करने के बाद ही महिला के नाम की एनओसी दी जाएगी।
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जिस राशन कार्ड में महिला का नाम दर्ज है उसमें पति, ससुर या अन्य किसी का नाम है तो उनमें से कोई सहकारी बैंक का डिफाल्टर नहीं होना चाहिए। उनमें से कोई डिफाल्टर होता है तो उनसे पहले कर्ज जमा कराया जाएगा और उसके बाद ही महिला के नाम से एनओसी मिलेगी।- सोमवीर, प्रबंधक सहकारी बैंक
किसी महिला के नाम से एनओसी चाहिए तो उसके पति के नाम के बिल का भुगतान पूरा होना चाहिए। इसके अलावा जिस घर में वह रहती है, उस घर का मीटर जिसके भी नाम है उसका भी पूरा भुगतान होता है, तभी एनओसी दी जाएगी। धर्मबीर छिकारा, एक्सईएन अर्बन