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उपभोक्ताओं के सवाल, फोरम के जवाब

Tue, 04 Mar 2014 02:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रश्न- क्या लोन के लिए दिए गए आवेदन को रिजेक्ट करने पर बैंक पर सेवाओं में कमी का मामला बनता है? क्या इसके लिए मैं कंज्यूमर कोर्ट में जा सकता हूं?  
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रवि चोपड़ा, चंडीगढ़

उत्तर- लोन देने के लिए बैंक के अपने अधिकार होते हैं। बैंक के नियमों और शर्तों पर जब आप खरे उतरेंगे तो ही बैंक आपको लोन देगा। इस मामले में उपभोक्ता अदालत में आपको कोई राहत नहीं मिलेगी।

प्रश्न- मैंने एक आनलाइन कंपनी से फोन के लिए आवेदन किया। उन्होंने मेरी मेल का जवाब दिया और एक कंर्फरमेशन मेल भी भेज दी। इसके साथ ही फोन की डिलीवरी का समय भी बता दिया। लेकिन, वेबसाइट द्वारा दिए गए समय के अनुसार मुझे फोन नहीं मिला। मैंने कंपनी से कहा कि ऑर्डर कैंसिल कर दे। लेकिन, कंपनी ने ऑर्डर कैंसिल नहीं किया और कहा कि फोन आउट ऑफ स्टॉक है। इसके बाद कंपनी ने रिफंड भी नहीं किया।
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रूपेश नारंग, चंडीगढ़

उत्तर- हां, आप इस मामले में कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के सेक्शन 2 (1)(जी) के तहत कार्रवाई कर सकते हैं। यह मामला सेवाओं में कमी का है। आप इस मामले में सीधे कंज्यूमर फोरम में अप्रोच करें।

प्रश्न- एक शिकायतकर्ता ने एक पुराने ट्रांजेक्शन को लेकर मामला दर्ज करवाया। यह मामला वर्ष 2007-08 का था। जबकि शिकायत वर्ष 2013 में की गई। कृपया बताएं कि क्या शिकायत सही है?
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उत्तर- कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 1986 दो साल का समय देता है, जिसके भीतर शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है। जैसा मामला आप बता रहे हैं, उसमें शिकायत का समय निकल गया है और इस मामले में कुछ नहीं किया जा सकता है।
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