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Chandigarh News: हिमाचल प्रदेश के वन विभाग की हरी झंडी मिलते ही शुरू होगा आदि बद्री बांध पर निर्माण

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सरस्वती बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन के साथ हुई हिमाचल प्रदेश के वन विभाग के अधिकारियों की बैठक
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फोटो सहित

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने के लिए हरियाणा सरकार के प्रयास अंतिम चरण में हैं। जल्द ही हिमाचल सरकार के वन विभाग द्वारा इसके लिए क्लीयरेंस मिलने वाली है। वन विभाग से हरी झंडी मिलते ही हिमाचल में सोम नदी पर बांध बनाने का काम शुरू होगा। इस दिशा में खुद हरियाणा सरस्वती विरासत विकास बोर्ड के चेयरमैन ने हिमाचल सरकार के पास कदम बढ़ाए हैं। सरस्वती बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन धुम्मन सिंह किरमिच ने हिमाचल प्रदेश के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में फारेस्ट क्लीयरेंस के बिदुंओं पर चर्चा हुई। फारेस्ट क्लीयरेंस के लिए हिमाचल प्रदेश की ओर से नोडल अधिकारी संजय सूद व नाहन जिला डीएफओ मौजूद रहे, जिसमें वन विभाग एनओसी को लेकर आ रही अचड़नों पर विचार-विर्मश किया गया। हिमाचल के अधिकारियों की ओर से आश्वासन दिया गया कि सोम नदी पर डैम की जल्द ही फारेस्ट क्लीयरेंस हो जाएगी। हरियाणा सरस्वती बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन धुम्मन सिंह ने बताया कि सरस्वती बोर्ड ने हिमाचल प्रदेश को 33 हेक्टेयर ज़मीन वन लगाने के लिए दी है, जिससे हिमाचल के साथ यह करार सम्पन्न हुआ। सरस्वती डैम के लिए यह आख़िरी क्लेरेंस है, जो जल्द हो जाएगी। सरस्वती नदी पर बनने वाले डैम को लेकर भी दोनों प्रदेशों की सरकारें गंभीर है। डैम बनने से हिमाचल प्रदेश के साथ पंचकूला, यमुनानगर व कुरुक्षेत्र सहित अन्य जिलों के किसानों को फायदा होगा, सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी। बता दें कि जनवरी माह में हिमाचल प्रदेश और हरियाणा सरकार के के बीच सोम नदी पर आदी बद्री बांध के निर्माण को लेकर एमओयू हो चुका है।
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यह है प्रोजेक्ट
आदिबद्री बांध हिमाचल की 31.66 हेक्टेयर भूमि पर बनाया जाएगा। चौड़ाई 101.06 मीटर व ऊंचाई 20.5 मीटर होगी। 215.33 करोड़ रुपये की लागत आएगी। बांध में हर वर्ष 224.58 हेक्टेयर मीटर पानी का भंडारण होगा। 61.88 हेक्टेयर मीटर पानी हिमाचल व शेष करीब 162 हेक्टेयर मीटर पानी हरियाणा को मिलेगा। इस पानी को सरस्वती नदी में प्रवाहित किया जाएगा। बांध बनने से यमुनानगर जिले के दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आने से बचेंगे, वहीं सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा।
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तीर्थाटन के रूप में भी होगा विकसित

पर्यटन की दृष्टि से कालका से कलेसर तक का क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में आदिबद्री, लोहागढ़, कपालमोचन, माता मंत्रादेवी सहित अनेक धार्मिक व पर्यटन स्थल आते हैं। बांध के साथ-साथ यहां झील बनने से बहुत से पर्यटक आएंगे। इससे दोनों प्रदेशों को लाभ मिलेगा।
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