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Chandigarh News: ब्लैक लिस्टेड याशी कंपनी को शहरी निकाय विभाग ने दी क्लीन चिट

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शहरी निकाय निदेशालय व नगर निकायों के अधिकारी विजिलेंस को नहीं दे रहे फिजिकल रिकाॅर्ड
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याशी कम्पनी के गलत सर्वें के कारण 8.02 लाख संपत्ति मालिकों ने 18.75 लाख आब्जेक्शन कराए थे दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में प्राॅपर्टी आईडी के सर्वे में हुए घोटाले के बाद याशी कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने के साथ उसका टेंडर भी रद्द कर दिया था, मगर अब शहरी निकाय विभाग ने कंपनी को क्लीन चिट दे दी है। प्राॅपर्टी आईडी घोटाले की सुनवाई 16 जुलाई को लोकायुक्त करेंगे। आरटीआई कार्यकर्ता और इस मामले में शिकायकर्ता पीपी कपूर की शिकायत पर लोकायुक्त जस्टिस हरिपाल वर्मा ने एंटी करप्शन ब्यूरो से जांच करवाने के बाद शहरी निकाय विभाग के प्रधान सचिव से जांच रिपोर्ट मांगी थी। शहरी निकाय विभाग के चीफ विजिलेंस ऑफिसर जे एस बोपाराए ने 6 मई को लोकायुक्त को दी अपनी जांच रिपोर्ट में सभी सरकारी अफसरों व याशी कम्पनी को क्लीनचिट दे दी है। जांच रिपोर्ट में खुद चीफ विजिलेंस ऑफिसर ने स्वीकार किया कि फिजिकल वेरिफिकेशन का रिकॉर्ड शहरी निकाय निदेशालय व नगर निकायों के अधिकारी उन्हें नहीं दे पाए। सर्वें में इतनी बड़ी धांधली, फ़र्ज़ीवाड़ा और लोगों की परेशानी के बावजूद सरकार ने सर्वें कंपनी कुल 62.63 करोड़ रुपये की पेमेंट भी कर दी। कंपनी ने आधी पेमेंट तो खाली प्लाटों की प्रॉपर्टी आईडी बना कर ले ली। बता दें कि प्रदेश में शहरी संपत्ति का ब्योरा लगाने के लिए सरकार की ओर से प्राॅपर्टी आईडी का सर्वे कराया गया। सभी 88 शहरों में प्रापर्टी आईडी के सर्वे का कार्य याशी कंपनी को सौंपा गया, जिनसे 42 लाख 70 हजार 449 संपत्तियों का सर्वे किया। इनमें से करीब 21.35 लाख संपत्तियां तो खाली प्लॉट,निर्माणाधीन अथवा तालाबंद भवन थे। इस मामले में लोकायुक्त में जाने पर सर्वें करने वाली जिस याशी कम्पनी को पिछले वर्ष 12 सितंबर को तत्कालीन तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया था। लोकायुक्त कोर्ट में 19 जुलाई 2023 को मामला ले जाने वाले पीपी कपूर ने आरोप लगाया कि इस फ़र्ज़ीवाड़े में संलिप्त प्रदेश के उच्चाधिकारी सहित निकाय विभाग के 90 कर्मियों ने यह कारनामा किया है, क्योंकि याशी कम्पनी के सर्वें की फ़िज़िकल वेरिफिकेशन किए बगैर ही इन अधिकारियों ने साइन ऑफ सर्टिफिकेट जारी करके इन अधिकारियों ने कम्पनी को करोड़ों रुपये पेमेंट करवा दी।
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18.75 लाख दर्ज हुई आपत्तियां

जांच रिपोर्ट मुताबिक ही निकाय विभाग के प्रॉपर्टी आईडी/एनडीसी पोर्टल पर 16 नवंबर, 2022 से दिनांक 21 मार्च 2024 के बीच कुल 8,02,480 संपत्ति मालिकों ने कुल 18,74,676 आपित्तयां दर्ज करवाई। यानि हर महीने औसतन 53,523 संपत्ति मालिक कुल करीब 1.25 लाख आब्जेक्शन दर्ज करा रहे हैं। इन कुल दर्ज ऑब्जेक्शन्स में से ज़रूरी दस्तावेजों के अभाव में 2,92,376 आब्जेक्शन रद्द कर दिये गये। जबकि 90,217 मामले आवेदकों के पास तो 24047 मामले नगर निकायों मे लंबित हैं। प्रदेश के सभी 88 शहरों में प्रॉपर्टी आईडी का सर्वें करने वाली जयपुर की याशी कम्पनी ने कुल 42,70,449 सम्पतियों का सर्वें किया। इनमें से करीब 21.35 लाख सम्पतियां तो खाली प्लॉट, निर्माणाधीन अथवा तालाबंद भवन थे फिर भी इनका भुगतान कम्पनी को कर दिया।
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