लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद हाईकमान द्वारा गठित कांग्रेस की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने पड़ताल शुरू कर दी है। कमेटी के सदस्यों ने वीरवार को कांग्रेस मुख्यालय में हारे उम्मीदवारों के साथ मीटिंग की। धनीराम शांडिल्य की अगुवाई में बनी पांच मेंबरी कमेटी के एक सदस्य सुभाष चोपड़ा मीटिंग में नहीं थे।
प्रताप सिंह बाजवा प्रदेश प्रधान के साथ-साथ हारे उम्मीदवार के तौर पर मीटिंग में शामिल हुए। उनके अलावा साधू सिंह धरमसोत और जोगिंदर सिंह पंजगराईं ने कमेटी के सामने अपना पक्ष रखा। एजेंडे के मुताबिक सुनील जाखड़, रजिंदर कौर भट्ठल, परनीत कौर व विजय इंदर सिंगला को भी अपना पक्ष रखना था, लेकिन वे नहीं आए।
सूत्रों के अनुसार, तीनों उम्मीदवारों ने अपनी हार का ठीकरा हलका इंचार्जों पर फोड़ा है। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं ने चुनाव के दौरान मुखालफत की। कई नेता तो हलका ही छोड़ कर चले गए, जिसका चुनाव में नुकसान हुआ। बाजवा ने कहा कि मतगणना वाले दिन उनके साथ कोई नेता नहीं था, वह अकेले ही थे।
उम्मीदवारों का यह भी कहना था कि उन्होंने आम आदमी पार्टी को कम आंका। जिसके चलते सरकार के खिलाफ एंटी-इंकम्बेंसी वोट का काफी हिस्सा आम आदमी पार्टी ले गई। कमेटी शुक्रवार को बाकी नेताओं का पक्ष सुनेगी। उसके बाद हाईकमान को रिपोर्ट सौंपेगी।
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में हार के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह और बाजवा गुटों में शुरू हुई जबानी जंग को रोकने के लिए हाईकमान ने इस कमेटी का गठन किया था।