पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने मंगलवार को कांग्रेस के सभी सदस्यों को नेम कर सदन से बाहर कर दिया। कांग्रेसी सदस्यों ने सरकार द्वारा विश्वास प्रस्ताव लाने का जमकर विरोध किया और नारेबाजी करते हुए स्पीकर के आसन के सामने वेल में जमा हो गए। इस समय तक सरकार की ओर से विश्वास प्रस्ताव पेश नहीं किया गया था लेकिन जैसे ही मुख्यमंत्री प्रस्ताव पेश करने के लिए खड़े हुए नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के साथ अन्य सभी कांग्रेसी सदस्य भी खड़े हो गए और प्रस्ताव लाए जाने का विरोध करने लगे।
इससे पहले बाजवा ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए सदन में कहा कि जब आम आदमी पार्टी (आप) के 92 विधायक सदन में हैं और जनता ने स्वयं उन्हें बहुमत दिया है, इसके अलावा सरकार से कोई बहुमत का प्रमाण देने की मांग भी नहीं कर रहा है तो विश्वास प्रस्ताव लाने की क्या जरूरत है? इसके साथ ही बाजवा ने राज्य सरकार द्वारा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मंशा भी पूछी।
उन्होंने कहा कि इस सत्र में न तो शून्यकाल है और न ही प्रश्नकाल। ऐसे में सदस्य अपने हलके के लोगों की समस्याओं को कैसे उठा सकेंगे। बाजवा ने यह भी कहा कि सदस्यों को सत्र बुलाए जाने से 15 दिन पहले नोटिस भी नहीं दिया गया। आखिर सरकार को सत्र बुलाने की ऐसी कौन की इमरजेंसी थी?
इस दौरान सदन में विश्वास प्रस्ताव को लेकर आप के सीनियर नेता अमन अरोड़ा अपनी बात रखने लगे तो प्रताप बाजवा समेत कांग्रेस के अन्य नेताओं ने इसका विरोध किया। हालांकि स्पीकर ने कांग्रेस सदस्यों को बार-बार बैठने को कहा लेकिन सभी सदस्य उठकर वेल में पहुंच गए और विश्वास प्रस्ताव लाए जाने का विरोध करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
कई बार चेतावनी देने के बाद स्पीकर ने सभी कांग्रेस सदस्यों को नेम करते हुए मार्शल को आदेश दिए कि वह कांग्रेस सदस्यों को सदन से बाहर निकाल दें। इसके साथ ही स्पीकर ने सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी लेकिन कांग्रेस सदस्य जब सदन से बाहर नहीं गए तो स्पीकर ने और 15 मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित करते हुए मार्शल को फिर से आदेश दिए। इसके बाद कांग्रेस के सभी सदस्य सदन से उठकर बाहर चले गए।