राज्यपाल ने कार्यसूची देखकर दी थी मंजूरी
आम आदमी पार्टी 22 सितंबर को विधानसभा का सत्र बुलाकर विश्वास मत प्रस्ताव पेश करना चाहती थी लेकिन राज्यपाल ने संविधान व कानून का हवाला देते हुए इस मुद्दे पर विधानसभा का सत्र आयोजित करने की मंजूरी नहीं दी। सरकार ने 27 सितंबर को सूबे से जुड़े पराली, बिजली, जीएसटी के मुद्दों पर चर्चा के लिए सत्र बुलाने का राज्यपाल से आग्रह किया।
कार्यसूची देखने के बाद राज्यपाल ने इसे स्वीकार कर लिया। इस बहाने सरकार ने मंगलवार को विश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। एक लाइन के विश्वास प्रस्ताव में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि हमारे विधायकों पर हमें विश्वास है। यह वह सौदा नहीं है जो बाजारों में बिक जाए।
ऐसे आया विश्वास प्रस्ताव
मंगलवार को विधानसभा सत्र शुरू होने के बाद सरकार ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक बुलाकर विश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला ले लिया लेकिन सदन में पेश किए जाने तक इस फैसले को सार्वजनिक नहीं किया। सदन में जैसे ही विश्वास प्रस्ताव लाने की घोषणा हुई, कांग्रेस के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया।
वड़िंग की चुनौती
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को चुनौती दी है कि अगर उनकी सरकार को बहुमत साबित करने की इतनी चाहत है तो वह विधानसभा चुनाव करवाकर दोबारा लोगों का विश्वास हासिल करें। नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा ने विधानसभा परिसर में कहा कि सरकार विश्वास प्रस्ताव लाकर सदन का समय बर्बाद कर रही है। जिन मुद्दों को लेकर यह सत्र बुलाया गया है, उनमें से किसी भी मुद्दे पर पहले दिन चर्चा नहीं हुई।
जनता के मुद्दों पर बहस ही नहीं हुई: अय्याली
विधायक मनप्रीत सिंह अय्याली ने कहा कि पंजाब में बिजली, एसवाईएल नहर, अवैध खनन, नशा व शराब तस्करी जैसे विभिन्न मुद्दे हैं, जिन पर सदन में चर्चा और बहस की जरूरत है। विश्वास प्रस्ताव लाकर सरकार जनता से जुड़े मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहती है।