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नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी: कांग्रेस का रास्ता साफ, मगर नेता बनेगा कौन, असमंजस बरकरार

Wed, 27 Mar 2019 12:12 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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हाईकमान लेगा फैसला - फोटो : File Photo
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इनेलो के हाथ से नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी छीनने के बाद कांग्रेस के लिए रास्ता साफ हो गया है। अब तक की स्थिति देखें तो विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पर कांग्रेस का दावा पुख्ता बनता है, क्योंकि कांग्रेस के पास विधानसभा में अब 17 विधायक हैं और इनेलो के पास 15 बचे हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पर विराजने वाला विधायक कौन होगा। 

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इसका फैसला हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष की सिफारिश के बाद ही तय होगा। कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष ही हरियाणा विधानसभा स्पीकर को उस विधायक के नाम की सिफारिश करेगा, जिसे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया जाना है। वैसे तो विधानसभा में अधिकतर विधायक पूर्व सीएम एवं विधायक भूपेंद्र सिंह हुड्डा खेमे के हैं। लेकिन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर हैं।

चूंकि दोनों नेताओं में फिलहाल मतभेद बने रहते हैं, इसलिए पार्टी सूत्रों के अनुसार नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी के लिए विधायक का चयन भी कांग्रेस हाईकमान ही करेगा। हाईकमान जिस विधायक के नाम पर मुहर लगाएगा, प्रदेशाध्यक्ष उसी के नाम की सिफारिश हरियाणा विधानसभा स्पीकर को भेजेंगे।

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इधर-उधर की छोड़, ये बता कारवां क्यों लुटा: डा. बांगड़

नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी जाने के बाद जजपा के प्रधान महासचिव डा. केसी बांगड़ ने इनेलो पर तंज कसा है। बांगड़ ने कहा कि यह देरी से उठाया गया सही कदम है क्योंकि अब न इनेलो के पास विधानसभा में सदस्यों का पूरा आंकड़ा है और न ही हरियाणा के मतदाताओं में इस पार्टी के लिए कोई कद्र रह गई है।

उन्होंने कहा कि इनेलो को छोड़ने वाले विधायकों की संख्या आने वाले समय में और बढ़ेंगी और चुनाव आते-आते इनेलो में वहीं विधायक रह जाएंगे जिन्हें अन्य राजनीतिक दलों में जगह नहीं मिलेगी।

 बांगड़ ने कहा कि इनेलो नेता अपनी बिगड़ती राजनीतिक सेहत के लिए जजपा को जिम्मेदार बताने की बजाय ये बताएं कि उनका कारवां क्यों उजड़ता जा रहा है। उनके अनुसार जजपा को समर्थन देने वाले सभी इनेलो विधायक भी कानून का पूरी तरह पालन करेंगे और नियमों के अनुसार ही कदम उठाएंगे।

दलबदल की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा: चौधरी
इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव आरएस चौधरी ने आरोप लगाते हुए कहा कि इनेलो के दोनों विधायकों ने पहले भाजपा ज्वाइन की थी और बाद में इस्तीफा दिया है। लेकिन अब ये बताने की कोशिश की जा रही है कि दोनों का इस्तीफा भाजपा ज्वाइन करने से पहले आ गया था। इसके लिए उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल खड़ा किया।
 
 उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब दलबदल की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष द्वारा तुरंत प्रभाव से रणबीर गंगवा, केहर सिंह रावत, नैना सिंह चौटाला, अनूप धानक, राजबीर फोगाट और पिरथी सिंह नंबरदार को विधानसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित करना चाहिए।  
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