कांग्रेस के फायर ब्रांड नेता नवजोत सिंह सिद्धू सोमवार को शिअद-अकाली सरकार के दौरान हुए बिजली खरीद समझौते को लेकर भड़क गए। उन्होंने ट्वीट कर इस समझौते पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग कर डाली। उन्होंने कहा कि वह इस मामले में 2017 से मांग कर रहे हैं लेकिन विभागीय नौकरशाही और चुने हुए मंत्रियों के दिखावे के कारण यह संभव नहीं हो पाया है।
ट्वीट कर उन्होंने पंजाब सरकार को नसीहत देते हुए लिखा है कि पंजाब विधानसभा में पीपीए पर श्वेत पत्र लाने से बादल और इस समझौते में शामिल अन्य लोगों की जवाबदेही तय की जा सकेगी। उन्होंने ट्वीट कर लिखा है कि पूर्ववर्ती शिअद-भाजपा शासन के दौरान हस्ताक्षरित बिजली खरीद समझौतों को एक कानून के माध्यम से रद्द कर दिया जाना चाहिए।
यह समझौता पंजाब को लूट रहा है। सिद्धू ने कहा कि इस मामले में आगे बढ़ने का एक मात्र रास्ता पंजाब विधानसभा में बनाया जाने वाला नया कानून है, जिसमें बिजली खरीद की कीमतों पर रेट्रो-इफेक्ट को सीमित किया गया है। हालांकि सिद्धू के इस ट्वीट से पहले शनिवार को कैप्टन ने जल्द ही पिछले शिअद-भाजपा शासन के दौरान हुए इस समझौते के खिलाफ कानूनी रणनीति बनाए जाने की घोषणा कर दी है। इस दौरान कैप्टन ने यह भी कहा था कि इस समझौते के जरिये राज्य पर पिछली सरकार ने बेवजह ही वित्तीय बोझ डाला है। हस्ताक्षरित समझौते में 139 पीपीए में से 17 राज्य की पूरी बिजली मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त थे।
पहले भी सिद्धू के निशाने पर रही अकाली सरकार
हाल ही में सिद्धू ने एक और ट्वीट किया था कि आइए हम कांग्रेस हाईकमान के लोक हितैषी 18 प्वाइंट एजेंडा से शुरू करें और 'पंजाब विधानसभा में नए विधान' के माध्यम से बिना किसी निश्चित शुल्क के नेशनल पावर एक्सचेंज के अनुसार दरें तय करके बादल-हस्ताक्षरित बिजली खरीद समझौतों से छुटकारा पाएं!
उन्होंने कहा कि बादल सरकार ने पंजाब में तीन निजी थर्मल प्लांटों के साथ पीपीए पर हस्ताक्षर किए। इसकी वजह से पंजाब 2020 तक 5400 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुका है। आगे भी 65 हजार करोड़ रुपये का भुगतान फिक्स चार्ज के तौर पर किया जाएगा, जबकि पंजाब नेशनल ग्रिड से काफी सस्ती दरों में बिजली खरीद सकता है।