क्या पंजाब की सत्ता में राजस्थान जैसी सियासी उथलपुथल शुरू हो सकती है? क्या पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रताप बाजवा पंजाब में कांग्रेस के लिए सचिन पायलट साबित होंगे? और क्या भाजपा अपनी सहयोगी शिअद के सहारे कैप्टन सरकार की बर्खास्तगी का माहौल बनाने लगी है?
जहरीली शराब कांड के कारण लगातार भीतरी और बाहरी हमले झेल रही पंजाब कांग्रेस की घबराहट इन सवालों पर साफ दिखाई देने लगी है। वीरवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ ही नहीं, सभी मंत्रियों ने भी विपक्ष के हमलों का जवाब देने के लिए मोर्चा संभाल लिया।
उन्होंने सबसे पहली मांग पार्टी के पूर्व प्रदेश प्रधानों प्रताप बाजवा और शमशेर सिंह दूलो को निकालने की उठाई। शाम को जब शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल राज्यपाल के पास कैप्टन सरकार बर्खास्त करने की मांग लेकर पहुंचे तो कई कैबिनेट मंत्रियों ने इसे भी राजस्थान के घटनाक्रम से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार अपनी सहयोगी शिअद के जरिए पंजाब में कांग्रेस सरकार के बर्खास्तगी का माहौल बनाने की साजिश रच रही है।