फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कांग्रेसी नेता बोले, क्षेत्रीय दलों का सफाया भाजपा का सराहनीय कदम

Mon, 18 Aug 2014 12:34 AM IST
राजेश शांडिल्य/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
विज्ञापन
विज्ञापन
भाजपा के कुटिल राजनीतिज्ञों वाले दांवपेंच कांग्रेसी दिग्गज गदगद हैं। भाजपा की इस परफोरमेंस से कांग्रेसी इतने आशावान है कि उन्हें अपनी पार्टी से नहीं, बल्कि भाजपा से ये उम्मीद है कि वह क्षेत्रीय दलों को कुचल कर एक नया इतिहास बना सकती है।
विज्ञापन


‘अमर उजाला’ से बातचीत में कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र कमेटी के अध्यक्ष डॉ. रामप्रकाश यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है तो वह इसके लिए भाजपा को साधुवाद देंगे।

उनका कहना है कि अच्छा कार्य जो भी करे, उसकी सराहना होनी चाहिए। शिक्षाविद कांग्रेसी का इशारा हजकां और इनेलो की ओर था। उनका मानना है कि क्षेत्रीय दलों के नेताओं की निजी महत्वाकांक्षाओं के चलते विकास का पहिया रुक जाता है।
विज्ञापन


बता दें कि ये नेताजी पुराने और पक्के कांग्रेसी होने का दम भरते हैं। वे हरियाणा में एक बार मंत्री, दो बार राज्यसभा सदस्य और प्रदेश कांग्रेस में उच्च पदों पर रहने के अलावा वर्तमान में भी सीएम हुड्डा ने चुनाव संबंधित महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है।

ये बात अलग है कि करीब दो दशक पहले वह भी बगावत का बिगुल बजाने पर चर्चा में रहे थे। बाद में वापस कांग्रेस में लौट आए।

यह बात दूसरी है कि वापसी करने पर भी वह एक बार टिकट न मिलने पर कांग्रेस को आंखें दिखाकर पड़ोसी जिले से टिकट हासिल कर हार चुके हैं।

यहां रोचक पहलू ये भी है कि हरियाणा में अब तक शायद ही कोई ऐसा क्षेत्रीय दल हो, जिसके जनक गैर कांग्रेसी हों। हरियाणा में अलग दल बनाकर राजनीतिक हलचल मचाने का कारनामा ज्यादातर कांग्रेस से टूट कर आए नेताओं ने ही किया।

दूसरे शब्दों में ये कहा जा सकता है कि अमीबा की तरह कांग्रेसी नेता पार्टी से टूटते रहे और हरियाणा में क्षेत्रीय दलों का काफिला बनता चला गया।

क्षेत्रीय दल की पहली सरकार वीएचवी ने बनाई
पंजाब से अलग होकर स्वतंत्र प्रांत बनने पर हरियाणा अभी ठीक से संभला भी नहीं था कि कुछ ही महीने बाद जो नई सरकार बनी वह पुराने कांग्रेसी के क्षेत्रीय दल  विशाल हरियाणा पार्टी (वीएचपी) ने जनसंघ के समर्थन और जोड़तोड़ करके बनाई थी।

हरियाणा के इतिहास में वीएचपी ही ऐसा पहला क्षेत्रीय दल है जो न केवल किसी कांग्रेसी ने बनाया था बल्कि इस क्षेत्रीय दल की हरियाणा में कई महीनों तक सरकार भी रही।

छोटे राव भी बना चुके हैं दल
भाजपा के वर्तमान केंद्रीय मंत्री और अहीरवाल के पुराने दिग्गज कांग्रेसी राव इंद्रजीत सिंह के पिता एवं हरियाणा के पूर्व सीएम राव वीरेंद्र सिंह हरियाणा के पहले राजनीतिक दल के जनक हैं।

पिता की तरह राव इंद्रजीत ने भी डेढ़ पहले अलग राजनीतिक दल का गठन किया था लेकिन बाद में इसका विलय भाजपा में कर दिया और आज वह केंद्रीय मंत्री हैं।

सिर्फ ताऊ और भजन अंत समय तक डटे रहे
ताऊ देवीलाल की लोकदल से लेकर राव वीरेंद्र सिंह की वीएचपी और उनके बाद बंसीलाल की हविपा के बाद भजनलाल की हजकां (बीएल) और वर्तमान में विनोद शर्मा तक सभी कांग्रेस से अलग दल बनाकर राजनीति के क्षेत्र में अंगद पांव जमाने के प्रयास में रहे।

लेकिन इनमें ताऊ देवीलाल की समय दर समय बदलते नामों वाली पार्टी की ही उम्र लंबी रही। उपरोक्त दलों में राव वीरेंद्र सिंह और बंसीलाल वापस कांग्रेसी बने लेकिन ताऊ देवीलाल और भजनलाल अंत समय तक अलग झंडा लिए डटे रहे।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें