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पहली बार मेयर चुनाव नहीं लड़ रही कांग्रेस

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चंडीगढ़। नगर निगम चुनाव के इतिहास में यह पहला मौका है जब कांग्रेस मेयर समेत तीनों पदों पर चुनाव नहीं लड़ रही। नगर निगम की स्थापना के बाद से अब तक के सभी चुनावों में कांग्रेस और भाजपा के बीच ही टक्कर रही है। इस बार आम आदमी पार्टी पहली बार निगम चुनाव में उतरी और कांग्रेस को सबसे कम सीटें मिलीं।
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चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस पार्टी ने कहा था कि वो आप और भाजपा दोनों का विरोध करेगी और मेयर चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस ने नवनिर्वाचित सभी पार्टियों के नेताओं से कांग्रेस को मेयर पद के लिए समर्थन की अपील भी की थी, कांग्रेस पार्षद हरप्रीत कौर बबला और उनके पति व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के भाजपा में शामिल होने के बाद कांग्रेस के सामने समस्या खड़ी हो गई। आठ में से बचे हुए सात पार्षदों को लेकर प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चावला जयपुर चले गए हैं। मंगलवार को शाम पांच बजे तक मेयर चुनाव के लिए नामांकन होना था लेकिन कांग्रेस के किसी पार्षद ने परचा नहीं भरा। मेयर चुनाव में अगर शिअद और कांग्रेस के पार्षद मतदान के लिए नहीं पहुंचते हैं तो दोनों दलों के 14-14 वोट होंगे। चुनाव में अगर दोनों दलों को अपने सभी 14 वोट मिल जाते हैं तो बराबरी की स्थिति बन जाएगी। ऐसे में टॉस के जरिए मेयर का चुनाव होगा।
अब शिअद के पार्षद पर टिकी सबकी निगाहें
नगर निगम चुनाव में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) को एकमात्र सीट मिली है। ऐसे में शिअद के पार्षद पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। शिअद चंडीगढ़ के प्रधान हरदीप सिंह बुटेरला पार्षद हैं। हरदीप सिंह का कहना है कि उनकी मुलाकात वीरवार को पार्टी के प्रधान सुखबीर सिंह बादल से होनी है। वहां पर जो भी आदेश होगा, उसका पालन किया जाएगा।
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कांग्रेस के पार्षद सात को शहर लौटेंगे
कांग्रेस सत्ता की लोभी नहीं है। नगर निगम चुनाव में सबसे अधिक मत हासिल करने के बाद भी कांग्रेस अधिक सीटें नहीं ला पाई। एक पार्षद भाजपा में चली गईं। इन परिस्थितियों को देखते हुए पार्टी ने मेयर चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया। अगली रणनीति चुनाव के दिन तय करेंगे। हरप्रीत कौर बबला को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि वह कांग्रेस की नीतियों की वजह से चुनाव जीती हैं। कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा से चुनाव जीततीं तो बेहतर होता। कांग्रेस के सातों पार्षद सात जनवरी को शहर में लौट आएंगे।
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राजेश शर्मा, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस
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