इस बार भी सिद्धू अगर नहीं माने तो उन्हें प्रदेश संगठन की कमान सौंपने के कयास लगाए जाने लगे हैं। इसके साथ ही हाईकमान ने पंजाब के सीनियर नेताओं को भी पार्टी में तरजीह देने का मन बना लिया है ताकि चुनाव में सीनियर नेताओं की जनता के बीच बनी साख का फायदा उठाया जा सके।
वहीं, इन दोनों ही स्थितियों में कैप्टन का नाराज होना तय है लेकिन हाईकमान का मानना है कि फिलहाल विवाद को शांत करना बहुत जरूरी है ताकि 2022 के चुनाव के लिए माहौल में एकजुट कांग्रेस की सक्रियता बढ़ाई जा सके।
इससे पहले बीते तीन दिनों के दौरान कमेटी ने पंजाब के सभी कांग्रेस विधायकों, मंत्रियों, सांसदों, सीनियर नेताओं को बुलाकर प्रदेश कांग्रेस के मौजूदा विवाद और उसे हल करने के उपायों पर उनकी राय ली थी। इस संबंध में पता चला है कि कैप्टन से नाराज नेताओं के अलावा वे नेता जो कैप्टन के पक्षधर हैं, उन्होंने भी बेअदबी और नशे संबंधी वादों के पूरा न होने का कारण जनता के बीच जाने में कठिनाई की बात कमेटी के सामने रखी है।
इस तरह, एक तरफ तो नाराज नेताओं के तर्कों को हाईकमान के सामने बल मिला है, वहीं कैप्टन के कामकाज के तरीके पर सवालिया निशान भी लग गए हैं। शुक्रवार को तीन घंटे की बैठक के बाद कैप्टन ने इतना ही कहा कि हर बात मीडिया के सामने नहीं हो सकती। वैसे, कैप्टन ने यह भी कहा कि पंजाब में छह महीने में चुनाव होने हैं, उसी सिलसिले में इस बैठक में बातचीत हुई है।