भाजपा का दामन थाम सकते हैं कुलदीप
कुलदीप बिश्नोई किसी भी समय भाजपा का दामन थाम सकते हैं। शनिवार शाम उनके दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने की चर्चा रही। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से उनकी मुलाकात जल्द संभव है। मुख्यमंत्री ने उनके भाजपा में आने का पहले ही स्वागत कर दिया है। कुलदीप पार्टी पदों से हटाए जाने के बाद खुद ही प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं।
छह साल बाद ही कांग्रेस से मोहभंग
कुलदीप के पिता भजन लाल ने 2007 में हजकां-बीएल बनाई थी। उसके बाद भाजपा के साथ गठबंधन में भी रहे। पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा की पार्टी हजपा के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली। जून 2011 में भजन लाल के देहांत के बाद कुलदीप ने पार्टी की कमान संभाली थी। 2009 के विधानसभा चुनाव में हजकां ने छह सीटें जीती, जिनमें से पांच विधायक भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार बनाने के लिए तोड़ लिए थे। हालांकि, 2014 में पांचों विधायकों की सदस्यता दलबदल कानून के तहत रदद कर दी गई थी। 28 अप्रैल 2016 को कुलदीप ने हजकां का विलय कांग्रेस में कर दिया था। छह साल बाद अब फिर से उनकी सियासी राह कांग्रेस से अलग होने वाली है।