चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय सीनेट स्नातक वर्ग चुनाव में सबसे बड़ी जीत का सेहरा कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों के सिर बंध सकता है। राजनीतिक पंडितों के मुताबिक इस खेमे के पास छह से सात सीटें जाने की संभावनाएं हैं। वहीं भाजपा व डीएवी ग्रुप के हाथ दो-दो सीटें लगने की उम्मीद है। पांच अन्य प्रत्याशियों की जीत की उम्मीद है, जिसमें जसपाल ग्रुप, कम्युनिस्ट ग्रुप व निर्दलीय प्रत्याशी शामिल होंगे।
स्नातक वर्ग चुनाव में 41 उम्मीदवार मैदान में थे, जिसमें कई रेस से बाहर हो गए। टॉप-20 मैदान में हैं, जिसमें से भी तीन की जीत दर्ज हो गई। इसमें एक कांग्रेस और एक भाजपा का सदस्य शामिल है। कुल 15 सदस्यों का इस चुनाव के जरिए चयन होना है। सीनेट की राजनीति से संबंध रखने वालों का कहना है कि स्नातक वर्ग की कुल सीटों पर सर्वाधिक लोग कांग्रेसी खेमे के ही जीतकर आएंगे। हालांकि पिछले वर्षों से एक-दो उम्मीदवार कम होंगे। भाजपा के सदस्य पहले भी दो ही चुनकर पहुंचे थे और इस बार भी इतने की ही उम्मीद नजर आ रही है।
इसी तरह डीएवी खेमे की दो सीटें आने की उम्मीद है। पिछली सीनेट में डीएवी व भाजपा का गठबंधन था। बाकी ग्रुप कांग्रेसी खेमे के साथ थे। यही कारण है कि पिछली सीनेट में कांग्रेसियों का दबदबा रहा। यदि कांग्रेसी खेमा इस बार भी गठबंधन छोटे ग्रुप या निर्दलीय प्रत्याशियों से करता है तो उनकी सीटों की संख्या बढ़कर 11 तक हो सकती है। हालांकि भाजपा खेमा भी गठबंधन की तैयारी में है। वह भी जोर लगा रहा है कि अन्य छोटे ग्रुप उनके साथ आएं। ऐसा होने पर फिर भाजपाई सीनेट में दबदबा कायम करने में सफल हो सकते हैं। कुल मिलाकर निर्दलीय व छोटे ग्रुपों के सदस्य ही बड़े खेमों को सीनेट में दबदबा कायम करने का मौका देंगे।
40 सदस्यों वाला ग्रुप हो सकता है सबसे अधिक दमदार
सीनेट में इस बार दबदबा कायम करने के लिए भाजपा ग्रुप पूरी ताकत से लगा हुआ है। यही कारण है कि मनोनीत सदस्यों की सूची में सर्वाधिक भाजपाई हैं। 36 में से 30 सदस्य भाजपाई अपने बता रहे हैं। वहीं विभिन्न वर्गों के हुए चुनाव में कांग्रेसी 28 से 30 सीटें अपनी बता रहे हैं। अब स्नातक वर्ग के परिणाम की सीटों की संख्या जोड़ ली जाएगी तो फिर आंकड़ा कुछ अलग होगा। जानकारों का कहना है कि इस बार सीनेट में 40 सीटें जिस ग्रुप के पास होंगी, उसका दबदबा होने की संभावनाएं अधिक होंगी। जानकारों का यह भी कहना है कि यदि भाजपा मनोनीत सदस्यों की सीटों पर ही ताली बजाती रही तो फिर सीनेट में दबदबा कायम करना आसान नहीं होगा। उन्हें एक-एक वोट जोड़ने की जरूरत होगी। वहीं दूसरी ओर कांग्रेसी खेमे ने अपना पूरा गणित तैयार कर लिया है। उनकी उंगलियों पर सदस्यों की संख्या है। वह अपना किला बचाने के लिए पूरी ताकत से मैदान में हैं।