पीपीपी की सेंट्रल कमेटी ने शुक्रवार को लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस से गठबंधन को हरी झंडी दे दी। पार्टी अध्यक्ष मनप्रीत बादल का बठिंडा से पीपीपी-कांग्रेस गठबंधन उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ना तय हो गया है।
सेंट्रल कमेटी की बैठक में गठबंधन से संबंधित सभी अधिकार मनप्रीत बादल को दे दिए गए। अब वह शनिवार को दिल्ली में कांग्रेसी नेताओं से मिलेंगे।
इस प्रकार पीपीपी-कांग्रेस गठबंधन की घोषणा किसी भी वक्त हो सकती है। उनके सेक्टर-3 स्थित निवास पर हुई बैठक में उपाध्यक्ष भगवंत मान को छोड़कर कमेटी के 45 में से 44 सदस्य उपस्थित हुए।
भगवंत के बारे में बताया गया कि वह किसी कार्यक्रम की शूटिंग में व्यस्त होने की वजह से बैठक में शामिल नहीं हुए। हालांकि, इस बात की भी चर्चा रही कि वह पीपीपी के ‘आप’ के साथ गठबंधन के पक्ष में और कांग्रेस से हाथ मिलाने के खिलाफ हैं। इसी वजह से वह बैठक में उपस्थित नहीं हुए।
बहरहाल पार्टी नेताओं ने कहा कि जनहित में अकाली-भाजपा को छोड़कर कांग्रेस या किसी अन्य पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया जाए।
यह भी कहा कि चुनावी गठबंधन से उन्हें कोई ऐतराज नहीं, लेकिन पार्टी का अस्तित्व कायम रहना चाहिए। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मनप्रीत बादल ने कहा कि सेंट्रल कमेटी ने उन्हें जो अधिकार दिए हैं, इसके मुताबिक वह दिल्ली में कांग्रेस सहित माकपा तथा भाकपा के राष्ट्रीय नेताओं से मुलाकात कर गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।
सीटों की संख्या के बारे में पूछे जाने पर मनप्रीत ने कहा कि वह कम से कम तीन सीटें साझा मोर्चा को देने की बात कांग्रेस से करेंगे।
माकपा के कांग्रेस के साथ गठबंधन के खिलाफ होने संबंधी सवाल के जवाब में मनप्रीत ने कहा कि वह दिल्ली में सीपीएम महासचिव प्रकाश करात सहित भाकपा नेताओं एबी बर्धन और सुधाकर रेड्डी से मुलाकात करेंगे।
उन्हें इस बात से अवगत कराया जाएगा कि पंजाब के मौजूदा राजनीतिक हालात में अकाली-भाजपा गठबंधन को हराने के लिए यहां के सभी विपक्षी दलों का एक मंच पर आना जरूरी है।
अकाली दल लौंगोवाल के संबंध में मनप्रीत ने कहा कि इसका लोकसभा चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है।
बाकी 4 मार्च को साझा मोर्चा की बैठक में पीपीपी सहित माकपा, भाकपा तथा अकाली दल लौंगोवाल के नेताओं के साथ बदले हुए हालात पर विस्तृत चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
‘आप’ के साथ गठबंधन संबंधी मनप्रीत बादल ने कहा कि यह संभव नहीं है। इसके नेता योगेंद्र यादव और संजय सिंह से उनकी मुलाकात हुई थी तथा उन्होंने उनसे स्पष्ट कहा कि ‘आप’ किसी के साथ गठबंधन नहीं कर सकती।
वह चाहें तो पीपीपी को इसमें मर्ज कर सकते हैं। मनप्रीत ने कहा कि वह पीपीपी का किसी भी दल में विलय नहीं कर सकते, इसलिए ‘आप’ के साथ जाने का सवाल ही नहीं।