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लोकसभा-विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के पक्ष में नहीं कांग्रेस, तीखी प्रतिक्रिया

Fri, 09 Jun 2017 11:52 AM IST
यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के सुझाव का भाजपा और अकाली दल ने समर्थन किया है तो कांग्रेस ने विरोध जताया है। वीरवार को कांग्रेस के राज्य सभा सांसद आनंद शर्मा के नेतृत्व में संसद की 31 सदस्यीय स्थायी समिति यहां चुनाव सुधार को लेकर राजनीतिक दलों की राय जानने पहुंची थी। चंडीगढ़ के एक निजी होटल में बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के सांसदों के सुझाव लिए।
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बैठक में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का मुद्दा भी उठा, जिस पर भाजपा-अकाली दल और कांग्रेस आमने- सामने आ गए। हरियाणा भाजपा की ओर से मुख्य सचेतक और विधायक ज्ञान चंद गुप्ता, पंजाब भाजपा के प्रतिनिधि मंजीत राय और शिरोमणि अकाली दल पंजाब की ओर से विधायक दलजीत चीमा ने एक साथ कराने की वकालत की, जिसका हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर ने खुला विरोध किया।

ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि चुनाव और उप-चुनाव अलग-अलग होने से विकास कार्य भी प्रभावित होते हैं। उन्होंने फर्जी वोट बनाने वाले अधिकारियों और राजनेताओं पर कड़ी कार्रवाई की भी सलाह दी। गुप्ता का कहना था कि गुरुग्राम फर्जी वोट मामले में भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पंजाब भाजपा के प्रतिनिधि मंजीत राय ने दूरदर्शन और रेडियो की तरह निजी चैनलों पर भी प्रचार की मंजूरी दिए जाने की सलाह दी।
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तंवर ने उठाया राज्यसभा चुनाव का इंक कंट्रोवर्सी मु्द्दा

अशोक तंवर
हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर ने राज्य सभा चुनाव का इंक कंट्रोवर्सी का मुद्दा कमेटी के सामने उठाया। उन्होंने कहा कि एक साल बाद भी कार्रवाई न होना अनुचित है। उन्होंने चुनावों में पैसे का दुरुपयोग रोकने का सुझाव दिया। तंवर ने कहा कि सभी चुनाव एक साथ कराए जाने से कांग्रेस सहमत नहीं है। शिअद की तरफ से दलजीत चीमा ने राजनीतिक दलों के लिए 2000 रुपये तक ही चंदा कैश लेने के फैसले को सराहा।

एक साथ चुनाव फिजिकली संभव नहीं : गुप्ता
हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अंकुर गुप्ता ने कहा कि राजनीतिक दलों के सुझावों को समिति संसद में रखेगी। देश में एक व्यक्ति-एक वोट प्रणाली लागू होने से वोटों की डुप्लिकेसी रुकेगी। वोटर्स का एक ही डाटा बेस होगा। देश में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव फिजिकली संभव नहीं हैं। वक्त के साथ हर प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियां बदलती रहती हैं। विधानसभा भंग होने पर लंबे समय तक राज्यों में राष्ट्रपति शासन नहीं लगा सकते।
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