चंडीगढ़। पंजाब कला भवन में आयोजित परंपरा नाट्य उत्सव के तीसरे दिन नाटक ‘हुण मैं सेट हां’ का मंचन किया गया। इस नाटक का निर्देशन बनिंदरजीत सिंह ने किया। यह नाटक पंजाब के युवा तबके की सोच पर आधारित है। इनका सपना अब सिर्फ विदेश जाकर नए मौकों की तलाश और ऐशोआराम के माध्यम से अपने सपनों को पूरा करना रह गया है।
यह नाटक दास्तां बयां करता है उन नौजवानों की जो अपने दाना-पानी की तलाश में विदेशों में संघर्ष कर रहे हैं। यह नाटक उन अभिभावकों की मानसिकता पर गहरा कटाक्ष करता है जो किसी भी कीमत पर अपने बच्चों को विदेशों में बसाने के लिए हरसंभव प्रयास करते हैं वो भी सिर्फ समाज में अपनी साख बनाए रखने के मकसद से। समाज का यह खास संदेश कहानी के मुख्य पात्र गगन के माध्यम से दिया गया है। गगन के पिता पाखर सिंह गांव के स्कूल के प्राचार्य हैं। वह अपनी एक विदेश यात्रा के दौरान कनाडा के रहन-सहन से बेहद प्रभावित होते हैं। इसके साथ ही वह निश्चय करते हैं कि गगन को किसी भी कीमत पर वहां बसाया जाएगा। इसके चलते वह भारी लोन उठाकर गगन को कनाडा भेज देते हैं। वह सोचते है कि गगन वहां जाकर अच्छी नौकरी कर पूरे परिवार को कनाडा में बसा लेगा। लेकिन पाखर सिंह की यह सोच सिर्फ एक सपने जैसी साबित होती है और 9 दिन के अंदर ही उसके सपने पूरे परिवार के सामने विकराल रूप लिए खड़ी होते हैं। कनाडा के जिस कॉलेज में उनके बेटे का दाखिला कराया जाता है वहां पर कोई हॉस्टल नहीं होता है। उन्हें धोखा दे दिया जाता है। वह महंगे होटल में रुकता है।
इसके बाद नवदीप के पैसे खत्म होने लगते हैं तो वह घर वापस आने की बात कहने लगता है। वह यह बात अपने पिता को बताता है। उसके पिता उसे पैसे भेजते हुए कहते हैं कि अगर वह घर वापस आएगा तो वह बहुत बेइज्जत होंगे। उन्होंने उसके कनाडा जाने से पहले पूरे गांव में पार्टी दी थी। वहीं नवदीप की मां भी उसे समझाती है। वह कनाडा में चार महीने के बाद भी रोजगार नहीं पाता है। इस कारण उसे परेशानी होती है। इसके बाद वह एक जगह छोटी सी नौकरी करने लग जाता है। इसके बाद से वह नशे में रहने लगता है। कनाडा में नवदीप को एक दिन उसकी मौसी मिलती है। वह अपने पति से कहकर उसे नौकरी दिलवा देती है। उसके बाद एक साल तक घर वालों से बातचीत नहीं होती है। धीरे धीरे नवदीप माता-पिता सहित सभी रिश्तेदारों को भूल जाता है। वह गम में शराब भी पीने लगता है। इस नाटक में कमलदीप कौर, नवदीप बाजवा, मनदीप मनी, मनोज कुमार, बलविंदर सिंह, नेहा धीमान, अंकुश राणा, अजय चौधरी, अमृतपाल, रवीन और शुभम गांधी ने अभिनय किया। नाटक में विवेक राय खन्ना लाइट्स पर, मोहित म्यूजिक पर और विनय युवराज लाइव सिंगर रहे। इसके साथ ही गुरप्रीत सिंह मान, बनिंदरजीत सिंह की लिरिक्स इसमें रहीं।