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पीयू के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग की चेयरपर्सन
एसोसिएट प्रोफेसर में प्रयोगशाला के लिए घमासान
- एसोसिएट प्रोफेसर के पास थी प्रयोगशाला, विभाग के जिम्मेदार लेना चाहते थे अपने कब्जे में
- जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद विभाग ने उपकरण निकाल ताला लगाया तो दूसरा ताला एसोसिएट प्रोफेसर ने जड़ा
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग की चेयरपर्सन व एसोसिएट प्रोफेसर में प्रयोगशाला को लेकर घमासान शुरू हो गया है। विभाग चाहता है कि एसोसिएट प्रोफेसर अपनी प्रयोगशाला उन्हें दें। वहीं, एसोसिएट प्रोफेसर विद्यार्थियों के लिए प्रयोगशाला अपने पास रखना चाहती हैं। प्रकरण उच्चाधिकारियों के पास पहुंचा और जांच कमेटी बनाई गई। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट भी तैयार कर दी। इसी बीच विभाग ने प्रयोगशाला को खाली करवाने का काम शुरू कर दिया। एसोसिएट प्रोफेसर को पता लगा तो उन्होंने प्रयोगशाला पर अपना ताला जड़ दिया। कुल मिलाकर इस घमासान से विद्यार्थियों का नुकसान हो रहा है, जो कुछ विद्यार्थी प्रयोग करना चाहते हैं, वह नहीं कर पा रहे।
यह है प्रकरण
सूत्रों का कहना है कि पीयू के केमिकल इंजीनियर विभाग के एक प्रोफेसर कुछ दिनों पहले सेवानिवृत्त हुए थे। उनके पास तीन प्रयोगशालाएं थीं। दर्जनों विद्यार्थियों को इन प्रयोगशालाओं में प्रशिक्षण मिल रहा था। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद प्रयोगशालाएं एसोसिएट प्रोफेसर गार्गी घोषाल के पास आ गईं। इसी बीच विभाग की चेयरपर्सन प्रो. अमृतपाल अपने कार्यालय के पास स्थिति एक प्रयोगशाला को लेना चाहती हैं। उस प्रयोगशाला का प्रयोग प्लेसमेंट सेल आदि के लिए किया जाने वाला था। प्रयोगशाला देने के लिए प्रो. गार्गी घोषाल तैयार नहीं हुईं। उनका तर्क था कि प्रयोगशाला में उपकरण आदि रखे हैं और फूड टेक्नोलॉजी के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाना है। इसे लेकर दोनों में घमासान शुरू हो गया। जब इस संदर्भ में चेयरपर्सन प्रो. अमृतपाल का पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने कहा कि अभी वह किसी बैठक में हैं, इस पर बाद में बात करेंगी, लेकिन बाद में उनसे संपर्क नहीं हो सका।
डीएसडब्ल्यू वुमन की अध्यक्षता में बनी जांच कमेटी
यह प्रकरण पीयू प्रशासन के पास पहुंचा तो इसके लिए डीएसडब्ल्यू वुमन प्रो. सुखबीर कौर की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित कर दी गई। इस कमेटी ने विभाग का दौरा किया। तीनों प्रयोगशालाओं को देखा। चेयरपर्सन के कमरे से लगी प्रयोगशाला का भी जायजा लिया और इस प्रयोगशाला को लेने को लेकर दोनों में ठनी हुई थी। सूत्रों का कहना है कि जांच कमेटी ने रिपोर्ट दी कि विभाग को यदि प्रयोगशाला की जरूरत महसूस हो रही है तो वह एसोसिएट प्रोफेसर गार्गी की अनुमति से प्रयोगशाला लें। साथ ही एसोसिएट प्रोफेसर की इस लैब की सामग्री को सुरक्षित स्थान पर रखवाया जाए और सुविधाएं दी जाएं। सूत्रों का कहना है कि इसी बीच विभाग की ओर से उस प्रयोगशाला का सामान निकलवाना शुरू कर दिया गया। आरोप है कि उपकरण इधर-उधर फेंक दिए गए। इसकी जानकारी एसोसिएट प्रोफेसर को लगी तो उन्होंने उस प्रयोगशाला पर अपना ताला जड़ दिया। एसोसिएट प्रोफेसर गार्गी घोषाल का कहना है कि यह प्रकरण उनका विभागीय है। इसे वह सार्वजनिक नहीं करना चाहतीं। विभाग के उच्चाधिकारियों को पूरा प्रकरण बता दिया गया है।
इनसेट---
पीयू में यह मामला चर्चा का विषय बना
पीयू के शिक्षकों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा है कि पीयू के उच्चाधिकारी इस प्रकरण पर निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। विद्यार्थी परेशान हैं। कई विद्यार्थी विभाग में आकर प्रयोग करना चाहते हैं। कुछ शिक्षकों का कहना है कि प्रयोगशाला विभाग के ही हिस्से में है। ऐसे में प्रयोगशाला लेने को लेकर खींचतान नहीं होनी चाहिए। प्रयोगशाला को एसोसिएट प्रोफेसर के पास रहने देना चाहिए ताकि विद्यार्थियों को लाभ मिल सके। शिक्षकों का कहना है कि उच्चाधिकारी इस प्रकरण को गंभीरता से लें अन्यथा मामला और बिगड़ेगा।
वर्जन---
केमिकल इंजीनियरिंग विभाग की प्रयोगशाला के विवाद की जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी गई है। अब वहां से ही आगे की कार्रवाई होगी।
- प्रो. सुखबीर कौर, डीएसडब्ल्यू वुमन