चंडीगढ़ के सेक्टर-26 स्थित पुलिस लाइन में दशकों पहले बने मकानों की हालत खस्ता है। प्रशासन की अनदेखी और सरकारी मकानों की कमी के चलते पुलिसकर्मी इन मकानों में रहने को मजबूर हैं। प्रशासन के पास भी इन मकानों की मरम्मत के लिए कोई ठोस योजना नहीं है, जिसका खामियाजा कर्मियों को भुगतना पड़ रहा है। हालात यह है कि पुलिस कर्मचारी मकानों में रहने से कतरा रहे हैं। वे बाहर किराए के मकानों में रहना ठीक समझते हैं।
पुलिस लाइन में अब पार्किंग की समस्या भी बढ़ गई है। लोगों ने गाड़ी खड़ी करने के लिए हरे पेड़ों तक को काट दिया है। हाल में एक पुराने पेड़ को काटा गया था। जसजीत कौर ने बताया की बारिश के दिनों में यहां तालाब जैसी स्थिति बन जाती है। लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। लंबे समय से लोगों को इस परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार इसकी शिकायत भी कर चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
जसजीत कौर ने बताया कि कई कर्मचारियों ने घर का हिस्सा बड़ा करने के लिए फुटपाथ और पार्किंग पर कब्जा कर लिया है। कई वरिष्ठ अधिकारियों ने कब्जे कर बंगले बना लिए हैं। सरकारी मकानों में सिर्फ दोपहिया वाहन को खड़ा करने की जगह दी गई थी, लेकिन अब इन मकानों में रहने वाले ज्यादातर लोगों ने कारें खरीद ली हैं। कुछ कर्मचारियों ने स्टोर को तोड़कर कमरा बना लिया है। इससे मकानों का नक्शा भी बदल गया है।
पुलिस लाइन में खस्ताहाल मकानों में रह रहे पुलिसकर्मियों के लिए मैं वर्ष 2016 से लड़ाई लड़ रही हूं। कई बार प्रशासन को इसके बारे में शिकायत कर चुकी हूं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अगर जल्द कार्रवाई न हुई तो मैं अदालत का दरवाजा खटखटाऊंगी। - जसजीत कौर, समाजसेवी, सेक्टर-26
यह समस्या आज की नहीं है। धनास में मकान बन गए हैं, ज्यादातर पुलिसकर्मी वहां रहेंगे। पुलिसकर्मी मकानों पर कोई कब्जा नहीं करते हैं। जिस तरह से उन्हें मकान अलॉट होता है, वह उसमें रहकर चले जाते हैं। पुलिस लाइन में मकानों की मरम्मत की जिम्मेदारी प्रशासन की है। समस्या को लेकर प्रशासन को पत्र भी लिखा है। जलभराव की समस्या के संबंध में अधिकारियों ने वहां निरीक्षण कर लिया है। - दिलशेर चंदेल, डीएसपी, पुलिस लाइन