चंडीगढ़। जीएमएसएच-16 में एंडोस्कोपी सुविधा तीन वर्षों से बंद पड़ी है। इस कारण पेट संबंधी समस्याओं वाले मरीजों को भारी परेशानी हो रही है। यह सेवा उस समय से ठप है, जब पूर्व टीकाकरण अधिकारी और एंडोस्कोपी करने वाले चिकित्सक डॉ. मंजीत त्रेहान सेवानिवृत्त हुए थे। उनके जाने के बाद अस्पताल में कोई विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हो पाया और महंगी एंडोस्कोपी मशीन डंप पड़ी हुई है।
अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी में रोजाना कई मरीज पेट दर्द, एसिडिटी, उलझन, ब्लीडिंग और अन्य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं की जांच के लिए आते हैं। सुविधा बंद होने के चलते उन्हें मजबूरन पीजीआई या जीएमसीएच-32 में रेफर किया जाता है। इससे न केवल इलाज में देरी होती है बल्कि मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ता है।
पूर्व एंडोस्कोपी विशेषज्ञ डॉ. मंजीत त्रेहान ने चिंता जताते हुए कहा कि प्रशासन को इस तरह की महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधाओं को जारी रखने के लिए सेवानिवृत्त होने वाले विशेषज्ञों को किसी न किसी रूप में जुड़े रखने पर विचार करना चाहिए। उनका कहना है कि चाहे प्रशिक्षण कार्यक्रम हों या कार्यशालाएं, ऐसे आयोजन होते रहने चाहिए। उधर, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि विशेषज्ञ डॉक्टर की तलाश जारी है लेकिन निर्धारित मानकों के अनुरूप विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
इंडोस्कोपी क्या है...आप भी जान लें
एंडोस्कोपी एक महत्वपूर्ण जांच है। इसमें एक पतली, लचीली ट्यूब के सिरे पर लगे कैमरे की मदद से भोजननली, पेट और आंतों के अंदरूनी हिस्सों की जांच की जाती है। इस प्रक्रिया से अल्सर, संक्रमण, सूजन, ब्लीडिंग, कैंसर के शुरुआती संकेत और अन्य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोगों का सटीक डायग्नोसिस किया जाता है। यह प्रक्रिया सामान्यतया बिना सर्जरी की जाती है। कई मामलों में शुरुआती स्तर पर ही बीमारी का पता चल जाने से रोगी का इलाज आसान और अधिक प्रभावी हो जाता है।