सिटी ब्यूटीफुल को स्मार्ट बनाने के लिए कंपनी फाइनल कर ली गई है। चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की वीरवार को बैठक हुई। इस बैठक में इगिस इंटरनेशनल कंपनी को फाइनल कर दिया है। यह कंपनी अब सिटी ब्युटीफुल को स्मार्ट बनाएगी। यह कंपनी 15 दिनों में अपना काम शुरू कर देगी। दो चार दिनों में ही कंपनी को प्रोजेक्ट अलाट कर दिया जाएगा। प्रोजेक्ट की लागत का पांच प्रतिशत कंपनी को बैंक गारंटी के रूप में जमा कराना होगा।
इगिस इंटरनेशनल कंपनी चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी में बदलने के लिए मैनेजमेंट कंसल्टेंट होगी। प्रशासन व निगम के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने इस सारी परियोजना को लागू करने व उसके खर्च का अनुमान लगाने के लिए निविदायें आमंत्रित की थी उसके जवाब में चार कंपनियों ने अपनी प्रजेंटेशन दी थी। इनमें एईसीओएम एशिया लिमिटेड, गुरुग्राम, व रॉयल हैस्कोनिंग डीएचवी ,नीदरलैंड व टाटा कंसलटिंग इंजीनियरिंग लिमिटेड, मुंबई शामिल थी। इन कंपनियों ने अपनी प्रस्तुति यूटी सचिवालय में एसपीवी के सदस्यों को दी थी।
वीरवार को इस संबंध में प्रशासक से ली गई राय के बाद निदेशक मंडल ने कंपनी का चयन किया। बैठक में स्मार्ट सिटी के सीईओ और नगर निगम कमिश्नर बी पुरुषार्था, विशेष वित्त सचिव जितेंद्र यादव, नगर निगम के चीफ इंजीनियर एनपी शर्मा, प्रशासन के चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद सहित अन्य सदस्य शामिल थे। बी पुरुषार्था ने बताया कि जो चार कंपनियां आई वह सभी अनुभवी व प्रतिष्ठित कंपनियां थी। उन्होंने अपनी- अपनी प्रस्तुति में अपने काम करने की पद्धति, कार्य योजना, टीम के सदस्यों की संख्या और कैसे वे इसे काम करेंगे इसके संबंध में विस्तार से जानकारी दी थी।
पहले वर्ष में 200 करोड़ रुपये मिलने वाले थे
चंडीगढ़
चंडीगढ़ प्रशासन को इस योजना के तहत पहले वर्ष में 200 करोड़ रुपये मिलने वाले थे। लेकिन अभी तक केवल 70 करोड़ रुपये ही मिले हैं। केंद्र से मिलने वाले अनुदान में प्रशासन ने भी बराबर का हिस्सा 200 करोड़ रुपये लगाना है। पहले वर्ष में इस परियोजना के अंतर्गत चार सौ करोड़ की परियोजनाओं पर काम शुरू होना है। अगले चार साल में केंद्र से 300 करोड़ रुपये मिलने हैं व इतनी ही राशि प्रशासन को जमा करनी होगी। चंडीगढ़ को वर्ष 2016 को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिला था ।
कंसल्टेंट कंपनी द्वारा सेक्टर 16, 17, 19, 22, 35 और 43 को विशेष एरिया बेस्ड विकास (एबीडी) में शामिल कर इनके विकास पर कुल बजट का लगभग 90 प्रतिशत खर्च किया जायेगा। सेक्टर 43 पर 5,600 करोड़ रुपये की अनुमानित फंड का 1 प्रतिशत स्मार्ट पार्किंग, 24 घंटे जलापूर्ति, बिजली और पानी, लेजर वैली में साइकिल ट्रैक, विकलांग के अनुकूल राह बनाने, पार्कों के विकास, स्ट्रीट लाइट आदि पर काम शुरु हो जायेगा। यह प्रोजेक्ट पांच वर्षों में पूरी होगी।