पंजाब के सरकारी अस्पतालों में मेडिकल और पैरा मेडिकल स्टाफ की भारी किल्लत है। इतना ही नहीं, राज्य में सब सेंटर, प्राइमरी हेल्थ सेंटर और कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर भी जरूरत से काफी कम हैं। यह खुलासा कम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (कैग) की रिपोर्ट में हुआ है। कैग ने नेशनल रूरल हेल्थ मिशन और रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ प्रोग्राम का 2011-16 तक का ऑडिट किया है।
कैग की रिपोर्ट के मुताबिक नियमानुसार राज्य में 33468 सब सेंटर, 578 पीएचसी, 144 सीएचसी होने चाहिए, लेकिन 2012 में 2950 सब सेंटर, 449 पीएचसी और 132 सीएचसी थे। 2016 में 2950 सब सेंटर, 427 पीएचसी, 150 सीएचसी हो गए। सीएचसी में बुनियादी ढांचे की बेहद कमी है। 92 फीसदी सीएचसी में अल्ट्रासाउंड, 83 में ब्लड स्टोरेज सुविधा, 66 में सुरक्षित अबॉर्शन सुविधा नहीं है। 80 प्रतिशत में पूरी दवाएं नहीं, 70 फीसदी में वाहनों की कमी है, साठ फीसदी में मेल-फीमेल के अलग वार्ड, चालीस फीसदी में स्टैंड-बाई जेनरेटर नहीं है।
मार्च-16 तक एनआरएचएम केतहत कॉन्ट्रैक्ट पर 1384 एएनएम, 133 मेडिकल अफसर, 1245 स्टाफ नर्स, 329 एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ तैनात था। जो काफी कम था। 138 सब सेंटरों में एएनएम नहीं थी, 37 पीएचसी में ऐलोपैथी डॉक्टर नहीं, 94 में फार्मासिस्ट, 99 में लेडी हेल्थ विजिटर, 143 में लैब टेक्नीशियन, 397 में अकाउंटेंट-कम- डाटा एंट्री ऑपरेटर नहीं थे। 150 पब्लिक हेल्थ नर्स की जरूरत केमुकाबले सिर्फ पंद्रह पोस्ट सैंक्शन हैं। किसी भी सीएचसी में पीएचएन नहीं थी।