सीबीएसई की ओर से जारी 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणाम में चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन इस बार निराशाजनक रहा है। इसकी जांच के लिए शिक्षा विभाग की ओर से कमेटी बनाई है। इसमें डिप्टी डायरेक्टर, प्रिंसिपल और शिक्षकों को शामिल किया गया है। पिछले चार सालों के परीक्षा परिणामों की तुलना के साथ परिणाम में कमी के सभी कारणों की डिटेल रिपोर्ट कारणों समेत मांगी गई है। इसके लिए कमेटी को दो हफ्ते का समय दिया गया है।
शहर के सरकारी स्कूलों के सीबीएसई बारहवीं बोर्ड में पिछले साल के मुकाबले ओवरऑल पासिंग प्रतिशत में 7.54 प्रतिशत गिरावट आई है। सिर्फ गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेंकेंडरी स्कूल मनीमाजरा का ही पासिंग प्रतिशत 100 रहा है। अन्य सभी स्कूलों में बच्चों के नंबरों में गिरावट आई है। 12वीं में 721 छात्रों की कंपार्टमेंट आई है। इन्हें परीक्षा में बैठने का एक और मौका दिया जाएगा। बारहवीं में सरकारी स्कूलों का पासिंग प्रतिशत 91.15 प्रतिशत रहा है जबकि वर्ष 2020-21 में 98.68 प्रतिशत था। वहीं दसवीं कक्षा में पिछले सत्र 2020-21 में पासिंग प्रतिशत 96.6 था। इस बार सत्र 2021-22 में पासिंग प्रतिशत 74.1 पर आ गया है।
दसवीं में 453 विद्यार्थी फेल हुए हैं और 2970 छात्रों की कंपार्टमेंट आई है। दसवीं में पिछले सत्र 2020-21 में शहर के कुल 96 सरकारी स्कूलों में से 65 स्कूलों का पासिंग प्रतिशत शत प्रतिशत रहा था। वहीं इस बार सिर्फ दो स्कूलों के 100 प्रतिशत छात्र पास हुए है। इसमें गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल-8 और गवर्नमेंट गर्ल्स मॉडल सीनियर सेंकेंडरी स्कूल-18 का स्कूल शामिल है। प्रमुख स्कूल जिनका परिणाम पिछले वर्ष शत प्रतिशत रहा था और हर साल बाजी मारते हैं। इस बार दसवीं बोर्ड के परिणाम में पिछड़ गए हैं। जीएमएसएसएस-16, जीएमएसएसएस-35, जीएमएसएसएसएस एमएचसी, जीएमएसएसएस-10, जीएमएसएसएस-47, जीएमएसएसएस-44, जीएमएसएसएस-37बी और जीएमएसएसएस-33 का परिणाम में गिरावट आई है। जीएमएसएसएस-मलोया में पासिंग प्रतिशत सिर्फ 19.2 रहा है। जीएचएस-24 का पासिंग प्रतिशत 32 और जीएमएचएस-22 का पासिंग प्रतिशत 38.4 रहा है जो काफी निराशाजनक है।
पिछले दो सालों में छात्रों को 9वीं और 12वीं में दिए गए थे ग्रेस अंक
पिछले दो सालों में कोरोना महामारी के कारण सरकारी स्कूलों में शिक्षा विभाग की ओर से नौवीं और ग्यारहवीं के छात्रों को छूट दी गई थी। दो साल से छात्रों को 30-30 ग्रेस अंक दिए गए। छात्रों को पास होने के लिए 33 अंक लेने होते हैं यानी कि इन छात्रों ने महज पांच अंक भी हासिल नहीं किए थे और इन्हें ग्रेस अंक देकर बोर्ड की कक्षाओं में बैठाया गया। बता दें कि ग्रेस अंक देने के बावजूद हजारों छात्रों की नौंवी और 11वीं में कंपार्टमेंट आई थी। इससे कोरोना समय में बच्चों के प्रदर्शन में आई गिरावट का अंदाजा लगाया जा सकता है।
शहर के स्कूलों में शिक्षकों के सैकड़ों पद खाली
शहर के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नई भर्ती करवाई जा रही है। वर्ष 2015 से लगातार शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं लेकिन कोई भर्ती नहीं हो रही है। इसके परिणामस्वरूप स्कूलों में शिक्षकों के सैकड़ों पद खाली है। कई स्कूलों में बारहवीं बोर्ड की कक्षाओं में संबंधित विषयों के लेक्चरार ही नहीं है। जेबीटी शिक्षकों की ओर से बोर्ड के बच्चों की कक्षाओं को एडजेस्ट किया जा रहा है। स्कूलों के पास बारहवीं में लीगल स्टडीज, मास कम्युनिकेशन जैसे विषय है, लेकिन स्कूलों में विषय विशेषज्ञ ही नहीं है। वालंटियर्स को बुलाकर खानापूर्ति करवाई जा रही है।
सरकारी शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक कामों में लगा दी जाती है ड्यूटी
पहले ही शहर के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। इसके बावजूद चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से गैर-शैक्षणिक कामों में शिक्षकों की बीएलओ स्तर पर ड्यूटी लगवा दी जाती है। विभागों की योजनाओं के सर्वे, चाइल्ड मैंपिंग, सरकारी एक मासिक और हफ्तों तक चलने वाले अभियानों का टारगेट भी स्कूल शिक्षकों पर थोपा जाता है। ऐसे में शिक्षक अपनी कक्षाओं पर फोकस ही नहीं कर पाते हैं।
पिछले चार सालों के परिणाम और प्रदर्शन जांच के निर्देश
इस बार बोर्ड के परिणाम में बेहतर प्रदर्शन नहीं रहा है। इसको लेकर विभागीय स्तर पर इंटरनल कमेटी बनाई गई है। पिछले चार सालों के बोर्ड कक्षाओं के परिणाम और प्रदर्शन की विस्तृत रिपोर्ट और विभाग की कमी के कारणों की डिटेल मांगी गई है। - हरसुहिंदर सिंह बराड़, स्कूल शिक्षा निदेशक