कमिश्नरेट पुलिस ने बुधवार को पंजाब के जालंधर में फॉरेन एजुकेशन इंडस्ट्री और इमीग्रेशन ऑफिसों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। करीब 20 कार्यालयों के लाइसेंस चेक किए गए, जिसमें से 19 अवैध पाए गए। पुलिस ने इसके बाद 25 लोगों को हिरासत में ले लिया। देर शाम 20 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। बुधवार को कमिश्नर पीके सिन्हा ने जालंधर पुलिस के कई थानों की टीमों का गठन किया। इन टीमों ने बस स्टैंड के पास स्थित एजीआई बिल्डिंग और साथ लगते एरिया में छापेमारी की गई।
एक साथ पुलिस मुलाजिमों ने कई कार्यालयों को घेर लिया और चेकिंग शुरू की। इस दौरान पुलिस ने बिना लाइसेंस के कार्यरत ट्रैवल एजेंसियों को सील कर दिया। अधिकतर कार्यालय ऐसे थे जिनके पास लाइसेंस नहीं थे। वे बिना अनुमति से ही चलाए जा रहे थे। जालंधर की नामवर कंपनी ई-पिरामिड सर्विस, ओसीईई के संदीप मक्कड़ को भी हिरासत में ले लिया गया। इसके अलावा करीब 20 कार्यालयों में बैठे स्टाफ के अलावा मालिकों को लेकर पुलिस थाने चली गई।
जालंधर में 1500 से अधिक चला रहे फॉरेन एजुकेशन ऑफिस
बस स्टैंड के आसपास और जालंधर में फॉरेन एजुकेशन ऑफिस चलाने वालों की संख्या 1500 से अधिक है। सरकार ने 2014 में एक्ट बताया था कि एजेंट को इसके लिए सरकार से लाइसेंस लेना होगा। इसके बाद 2016 में इसमें संशोधन किया गया था। सरकार की तरफ से करीब 400 लोगों को लाइसेेंस जालंधर में जारी किए जा चुके थे, लेकिन बाकी लोगों के पास लाइसेंस नहीं थे। कई लोगों ने आवेदन कर रखा था।
फतेहगढ़ साहिब में भी छापेमारी
फतेहगढ़ साहिब में भी विभिन्न पुलिस स्टेशनों की टीमों ने करीब छह ट्रेवल एजेटों को दफ्तरों पर देर शाम छापेमारी की गई। सभी टीमों का नेतृत्व सीआईए स्टाफ सरहिंद के इंचार्ज दलबीर सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि जिन एजेटों के पास लाइसेंस नहीं हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। चार नंबर चुंगी सरहिंद के पास जीइसीसी सेंटर में छापेमारी के दौरान वहां का स्टाफ लाइसेंस नहीं दिखा सका। इसके मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। देर रात टीमों की छापेमारी जारी थी। उन्होंने बताया कि पूरे जिले में केवल एक रजिस्टर्ड ट्रैवल एजेंट है।
फॉरेन एजुकेशन इंडस्ट्री में हाहाकार, रोष जताया
पुलिस की छापेमारी के बाद फॉरेन एजुकेशन इंडस्ट्री में हाहाकार मच गया। एसोसिएशन ने पुलिस कार्रवाई पर कड़ा एतराज जताया और कहा है कि जिन लोगों ने आवेदन कर रखे थे, उनके कार्यालयों पर सरकार ने छापेमारी की है। अधिकारियों और मुलाजिमों को खुद एक्ट का ज्ञान नहीं है, वह हमारे ऊपर कैसे लागू कर सकते हैं। पहले पुलिस अधिकारियों को एक्ट के बारे में समझना चाहिए। एसोसिएशन ऑफ कंसल्टेंट फॉर ओवरसीज स्टडीज के प्रधान सुकांत त्रिवेदी, सचिव लविश कालिया, प्रवक्ता इंदरजीत सिंह, फास्ट-वे इमिग्रेशन के सुमीन ओबराय समेत बड़ी संख्या में जमा हुए एजुकेशन कंसल्टेंट ने पुलिस की कार्रवाई को धक्केशाही करार दिया। एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि लाइसेंस लेने के लिए कई कारोबारियों ने पिछले चार साल से अप्लाई किया हुआ है, लेकिन उनको लाइसेंस नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जालंधर में 500 से अधिक ऐसे एजेंट्स हैं, जिन्होंने न तो आवेदन किया है और न ही लाइसेंस लिया है। उनको पुलिस कुछ नहीं कहती क्योंकि उनके साथ सांठगांठ है। नकली एजेंटों पर कार्रवाई होनी चाहिए।