यूटी में कामर्शियल वाहनों के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अब महंगा हो गया है। कामर्शियल वाहन चालकों को भी अब प्राइवेट वाहन चालकों की तरह की वाहन की कीमत पर वन टाइम रोड टैक्स देना होगा। यूटी के परिवहन विभाग की ओर से बुधवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई और नया टैक्स 22 सितंबर से प्रभावी होगा।
22 सितंबर से आटो रिक्शा, टैक्सी, बसों की रजिस्ट्रेशन कराने वालों को वाहन की कीमत का 6 फीसदी रोड टैक्स के तौर पर जमा करना होगा। अभी तक कामर्शियल वाहन चालक बहुत ही कम रोड टैक्स देते थे।
आटोरिक्शा चालकों को हर सात 350 रुपये रोड टैक्स देना होगा। अब उन्हें आटो रिक्शा खरीदने के बाद उसकी रजिस्ट्रेशन कराने पर आटो रिक्शा की कीमत का 6 फीसदी वन टाइम रोड टैक्स देना होगा। इसी तरह से बस चालकों, एंबुलेंस, टैक्सी चालकों, सामान ढोने वाली गाड़ियों या कामर्शियल प्रयोग के लिए इस्तेमाल होने वाले दो पहिया वाहन चालकों को भी वाहन की कीमत का छह फीसदी वन टाइम रोड टैक्स देना होगा।
इसके साथ साथ दूसरी राज्यों के प्राइवेट वाहनों को चंडीगढ़ में ट्रांसफर कराने के लिए अब ज्यादा फीस देनी होगी।
दूसरे राज्यों से ट्रांसफर की जाने वाली गाड़ी की ट्रांसफर फीस अभी मॉडल के हिसाब से अधिकतम 1800 रुपये तक है। इसे बढ़ाकर वाहन की कीमत के हिसाब से तय किया गया है। वाहन की कीमत का छह फीसदी अब रोड टैक्स देना होगा।
ध्यान रहे कि केंद्रीय परिवहन मंत्रालय की ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट काउंसिल ने कुछ महीने पहले प्रशासन को पत्र भेजकर कामर्शियल वाहनों पर रोड टैक्स बढ़ाने को कहा था। मंत्रालय से पत्र आने के बाद एसटीए ने कामर्शियल वाहनों के रोड टैक्स में बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार कर यूटी के परिवहन विभाग को भेजा था।
मंत्रालय के पत्र में स्पष्ट था कि कामर्शियल वाहनों की सिटिंग कैपेसिटी के हिसाब से या लोड के हिसाब से रोड टैक्स न बढ़ाया जाए। इसकी जगह दूसरे वाहनों की तरह ही इनका रोड टैक्स भी वन टाइम किया जाए।
रजिस्टरिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) ने भी परिवहन विभाग को दूसरे राज्यों से चंडीगढ़ में ट्रांसफर होने वाली वाहनों की फीस बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा था। प्रस्ताव में स्पष्ट था कि जो गाड़ियां दूसरी स्टेट से ट्रांसफर की जाती हैं, उन पर मॉडल के बजाय वन टाइम फीस लगाई जाए।