दो बार एवरेस्ट फतह करने वाले सुधीर सिंह के परिवार ने सोचा न था कि अपनी दस साल की बेटी तानिया को इस बार जन्म दिन की मुबारकबाद वह नहीं दे पाएंगे। इसके बदले ठीक बेटी के जन्म दिन के मौके पर उनका शव घर पहुंचेगा। उत्तराखंड के गंगोत्री क्षेत्र में हुए हादसे में सुधीर की मौत की खबर से उनके गांव छोटा भनवाल में मातम का माहौल है। इलाके के लोग स्तब्ध हैं, उन्हें यकीन नहीं हो रहा है कि अपनी दिलेरी के लिए विख्यात सुधीर सिंह अब उनके बीच नहीं रहे।
सेना के जैक राइफल्स के नायबसूबेदार सुधीर सिंह की दो बेटियां और एक बेटा है। बड़ी बेटी तानिया पांचवीं कक्षा की छात्रा है। उनके परिजनों ने बताया कि 28 सितंबर को तानिया का जन्मदिन है। एक दिन पहले ही सुधीर ने छुट्टी पर घर आने की जानकारी परिजनों को टेलीफोन पर दी थी, लेकिन काल की क्रूरता ने बेटी के जन्मदिन पर उसे तोहफा देने की हसरत छीन ली। उधर, तोहफे के इंतजार में बैठी तानिया को पिता की मौत की खबर मिली।
मौत की खबर आने के बाद क्षेत्र का हर कोई अवाक है। सुधीर सिंह की मौत की खबर शुक्रवार दोपहर उनके परिजनों को मिली, तो परिवार में खुशी का माहौल पल भर में मातम में बदल गया। सुधीर गंगोत्री हिमालय क्षेत्र में लापता खोजी अभियान को ढूंढकर वापस लौटते समय सोनगढ़ उत्तरांचल के पास हुई दुघर्टना के शिकार हो गए थे। अभी पिछले महीने ही उनकी पोस्टिंग श्रीनगर से दिल्ली हुई थी। सुधीर अपने परिवार के तीन भाइयों व एक बहन में सबसे बड़े थे।
कई खिताब किए सुधीर ने अपने नाम
सुजानपुर (पठानकोट)। एवरेस्ट जैसे शिखर पर चढ़ने का साहस दिखाने वाले सुधीर के नाम कई रिकार्ड हैं। सुधीर ने साल 2012 व 2013 में दो बार एवरेस्ट फतह किया था। उन्होंने मई 2012 में माउंट एवरेस्ट फतह किया था। इसके बाद 2013 में उन्होंने दोबारा इस क्रम को जारी रखा। तब नेपाल के आर्मी चीफ जरनल गौरव एसजेवी राणा और सेना के पूर्व जरनल बिक्रम सिंह ने उन्हें सम्मानित किया था।