चंडीगढ़ की कॉलोनी नंबर-चार में इन दिनों अजीब सा सन्नाटा है। ज्यादातर लोग नौकरी छोड़ कर घर बैठे हैं और दिनभर यही चर्चा चल रही है कि कॉलोनी के टूट जाने के बाद वह कहां जाएंगे। घरों में चूल्हा तक नहीं जल रहा। कॉलोनी में रहने वाले लोगों का कहना है कि जब पूरे देश में कोरोना वायरस फैल रहा है।
लोगों को घर में रहने के लिए कहा जा रहा है लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन हजारों लोगों को बेघर करने पर तुला है। लोगों का कहना है कि जब से उन्होंने सुना है कि कॉलोनी टूट रही है, रात की नींद उड़ गई है। बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है। दस्तावेज पूरे हैं, मलोया में हजारों मकान खाली पड़े हैं लेकिन फिर भी लोगों को परेशान किया जा रहा है।
अमर उजाला ने बुधवार को कॉलोनी नंबर-चार का दौरा किया, कई लोगों से बातचीत की। इस दौरान एक महिला ने आंसू पोंछते हुए कहा कि पूरी जिंदगी कॉलोनी में गुजारी है। 50 साल से यहां रह रहे हैं। मकान का सपना देखते पति की मृत्यु हो गई लेकिन आज तक पक्की छत नसीब नहीं हुई। महिला ने कहा कि वह मर जाएंगी लेकिन घर को नहीं तोड़ने देंगी।
लोगों का कहना है कि जिनके पास बायोमेट्रिक सर्वे और अन्य दस्तावेज हैं, उन्हें मकान देने के बाद ही कॉलोनी तोड़ी जानी चाहिए। प्रधानमंत्री आवास योजना गरीबों के लिए हैं, लेकिन उसका भी यहां के लोगों को लाभ नहीं मिल रहा है।
टीन शेड में शिफ्ट किया जाएगा या नहीं, यह भी तय नहीं
एडवाइजर मनोज परिदा ने कुछ दिन पहले कहा था कि कॉलोनी नंबर-4 में जिन लोगों के मकान पेंडिंग में हैं, उन्हें सेक्टर-56 के टीन शेड में टेंपररी तौर पर शिफ्ट किया जाएगा लेकिन अब प्रशासन का कोई भी अधिकारी इस पर बोलने को तैयार नहीं है। ऐसे में कॉलोनी वासी और ज्यादा डर गए हैं क्योंकि करीब 500-700 लोग ऐसे हैं, जिनके मकान किसी न किसी वजह से पेंडिग में हैं।
अधिकारी कहते हैं फाइल चल रही है
जुलाई में फाइनेंस सेक्रेटरी ने इस्टेट ऑफिस को मकान देने के लिए लेटर जारी कर दिया लेकिन अभी तक वहां के अधिकारी घुमा रहे हैं। मैं लेटर दिखाता हूं तो अधिकारी कहते हैं कि फाइल चल रही है। कॉलोनी टूट जाएगी तो मैं बच्चों को लेकर कहां जाउंगा।
- जोगिंदर यादव, कॉलोनीवासी
समझ नहीं आ रहा कहां जाएंगे
इस्टेट ऑफिस वाले हर बार बुलाते हैं और कहते हैं कि मकान मिल जाएगा। नवंबर से यही सुन रहे हैं। सभी दस्तावेज पूरे हैं। फाइनेंस सेक्रेटरी ने भी फाइल को अप्रूवल दे दी है। अब पता चला है कि कॉलोनी टूट रही है। समझ नहीं आ रहा कहां जाएंगे।
- प्रदीप, कॉलोनीवासी
अधिकारी सिर्फ कहते हैं मकान मिल जाएगा
सभी दस्तावेज पूरे हैं। हाउसिंग बोर्ड ने मकान नंबर भी जारी कर दिया इस बीच पिता और माता की मृत्यु हो गई। अब एक साल हो गए हैं सिर्फ भगाया जा रहा है। कई बार अधिकारियों से भी मिल चुकी हूं लेकिन यह कहकर भेज देते हैं कि मकान मिल जाएगा।
- अनीता, कॉलोनीवासी
पक्की छत का सपना टूटता नजर आ रहा
मकान के लिए चक्कर काट-काट कर थक गए हैं। पूरी जिंदगी इसी आस में गुजार दी कि कभी तो पक्की छत मिलेगी लेकिन अब वह भी सपना टूटता ही नजर आ रहा है। दस्तावेज पूरे हैं। फाइनेंस सेक्रेटरी ने भी मंजूरी दे दी है।
- ननकू, कॉलोनीवासी
कर्मचारी गलती की सजा भुगत रहे
कॉलोनी में रहते 50 साल हो गए हैं। पति का नाम कन्हैया लाल था तो कर्मचारियों ने धनिया लाल कर दिया। अब उसकी वजह से मकान पेंडिंग में है। कर्मचारियों की एक छोटी गलती सी सजा हम लोग आज तक भुगत रहे हैं। कोई सुनने को तैयार नहीं है।
- फूल मति, कॉलोनीवासी
कॉलोनी तोड़ देंगे तो कहा जाऊंगी
पूरी जिंदगी यहां गुजार दी है। मकान के दस्तावेज पूरे हैं लेकिन पति की मृत्यु हो गई है। इस वजह से पेंडिंग में डाल दिया गया है। महीनों से इस्टेट ऑफिस के चक्कर काट रही हूं लेकिन कोई सुनवाई नहीं है। कॉलोनी तोड़ देंगे तो कहा जाऊंगी।
- फूल दुलारी, कॉलोनीवासी
पीएमएवाई का काम पूरा करे प्रशासन
प्रशासन प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कॉलोनी नंबर-4 की जनता को आवास देने का काम करें क्योंकि चंडीगढ़ में अगर सबसे अधिक कहीं गरीब जनता रहती है तो वह कॉलोनी नंबर-4 में रहती है और अभी प्रशासन के पास 2500 से ज्यादा मकान खाली पड़े हैं।
- राजिंदर यादव, महासचिव, कॉलोनी संघर्ष समिति