चंडीगढ़। यूटी इंप्लाइज हाउसिंग वेलफेयर सोसाइटी ने चंडीगढ़ प्रशासन से आवासीय संपत्तियों पर भी कलेक्टर रेट को कम करने की मांग की है। सोसाइटी के प्रधान बलविंदर सिंह और महासचिव डॉ. धर्मेंद्र ने कहा है कि कलेक्टर रेट ज्यादा होने की वजह से चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की कई योजनाएं सिरे नहीं चढ़ पा रही है, न ही कर्मचारियों को मकान मिल पा रहे हैं, इसलिए आवासीय संपत्तियों पर 50 प्रतिशत कलेक्टर रेट कम करना चाहिए।
सोसाइटी के सदस्यों का कहना है कि व्यावसायिक संपत्तियों के कलेक्टर रेट को 10 प्रतिशत घटाया गया है, जोकि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। इन दामों को भी 40 से 50 प्रतिशत तक कम करना चाहिए, तब जाकर लोगों को राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि कलेक्टर रेट ज्यादा होने की वजह से पिछले 13 सालों से यूटी इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम लंबित पड़ी है। शहर में प्रधानमंत्री आवास योजना भी सिरे नहीं चढ़ पा रही है। हाउसिंग बोर्ड कई आवासीय योजनाएं लांच कर रहा है, लेकिन महंगे होने की वजह से उन्हें खरीदार नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन में काम कर रहे कर्मचारी ही प्रशासन की रीढ़ हैं। अलग-अलग विभागों में काम करते हुए कर्मचारियों ने अपने जीवन के 35 से 40 वर्ष शहर की सेवा में बिता दिए, लेकिन सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें शहर छोड़कर जाना पड़ता है या फिर किराए पर मकान लेकर रहना पड़ रहा है।
डॉ. धर्मेन्द्र ने कहा कि 2008 से अब तक 400-500 कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि कई तो अपने मकान का सपना लिए दुनिया ही छोड़कर चले गए। सोसाइटी के पदाधिकारियों ने प्रशासक वीपी सिंह बदनौर से मांग की है कि अगर कलेक्टर रेट को कम किया जाता है तो ही यूटी हाउसिंग इंप्लाइज स्कीम भी सिरे चढ़ पाएगी और हाउसिंग बोर्ड को भी लाभ होगा।